International Desk: लेबनान के शक्तिशाली ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला ने इजराइल और लेबनान सरकार के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते को खारिज कर दिया है। संगठन के प्रमुख नईम कासिमने स्पष्ट कहा कि दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्ला लड़ाकों को हटाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। हिजबुल्ला के टीवी चैनल Al-Manar पर प्रसारित एक लिखित बयान में कासिम ने कहा कि हमलों के बीच लड़ाकों को पीछे हटाने की शर्त का मतलब “आत्मसमर्पण, पराजय और दुश्मन के उद्देश्यों को पूरा करना” होगा।
उन्होंने कहा कि हिजबुल्ला की पहली प्राथमिकता इजराइली हमलों का अंत, वास्तविक युद्धविराम और इजराइली सेना की वापसी है।कासिम ने कहा कि जब तक लेबनान के क्षेत्रों में इजराइली सैन्य मौजूदगी बनी रहेगी, तब तक प्रतिरोध जारी रहेगा। उनके शब्दों में, “जब तक कब्जा जारी रहेगा, हमने किसी भी पक्ष से प्रतिरोध बंद करने की कोई प्रतिबद्धता नहीं की है।” अमेरिकी मध्यस्थता में हुए चौथे दौर की वार्ता के बाद इजराइल और लेबनान ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
समझौते के अनुसार:
लेबनान के भीतर कुछ विशेष सुरक्षा क्षेत्र बनाए जाएंगे।
इन क्षेत्रों में हिजबुल्ला लड़ाकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
युद्धविराम तभी प्रभावी माना जाएगा जब हिजबुल्ला सभी हमले बंद करे।
संगठन को Litani River के दक्षिणी क्षेत्रों से अपने सभी लड़ाके हटाने होंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि हिजबुल्ला द्वारा समझौते को ठुकराना क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा सकता है। यदि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहते हैं तो इजराइल-लेबनान सीमा पर संघर्ष दोबारा भड़क सकता है। युद्धविराम लागू करना मुश्किल हो जाएगा। मध्य पूर्व में पहले से जारी अस्थिरता और गहरी हो सकती है।अमेरिका की मध्यस्थता वाली शांति प्रक्रिया को बड़ा झटका लग सकता है।












