International Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) द्वारा ईरान को बातचीत में देरी की कीमत चुकाने की चेतावनी दिए जाने के बाद अमेरिका ने गुरुवार तड़के ईरान में नए हवाई हमले किए। जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया। दो महीने पुराने युद्धविराम के बावजूद हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच लगातार जवाबी हमले हो रहे हैं। यह सप्ताह में तीसरी बार है जब संघर्ष ने युद्धविराम को गंभीर चुनौती दी है।
अमेरिका और ईरान दोनों सार्वजनिक रूप से समझौते की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ी है और तेल कीमतों में उछाल देखा गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ताजा हवाई हमलों में ईरान की सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों और वायु रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमलों के दौरान Tehran, Bandar Abbas और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं। ईरानी जवाबी कार्रवाई के बाद कुवैत की वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय हो गईं। अधिकारियों ने संभावित खतरों को देखते हुए देश का हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया और कई उड़ानों का मार्ग बदल दिया। बहरीन और जॉर्डन में भी सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत Amir Saeid Iravani ने कहा कि यदि अमेरिका वास्तव में समझौता चाहता है तो उसे धमकियों और सैन्य दबाव की नीति छोड़नी होगी। उन्होंने कहा कि ईरान दबाव में कभी बातचीत नहीं करेगा। तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी परामर्श के बाद एक कतरी प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा है ताकि दोनों पक्षों के बीच वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत और जब्त संपत्तियों की रिहाई जैसे मुद्दों पर अभी भी गहरे मतभेद बने हुए हैं।

















