Punjabi News

Pellet Gun Row: पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस

6

Pellet Gun Row : सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक मामले पर सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में पूर्व IPS अधिकारी यशोवर्धन आज़ाद और पैलेट गन से घायल हुए दो लोगों की याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं में नागरिक सभाओं और विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह भी आदेश दिया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों द्वारा इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस विशेष स्थितियों में इसका इस्तेमाल कर सकती है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक पैलेट गन के इस्तेमाल की परमिशन देने वाले पुलिस नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इस पर रोक लगाने का आदेश देना मुश्किल है। कोर्ट ने इसके इस्तेमाल से जुड़ी गाइडलाइन पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भले ही पेलेट गन को “कम जानलेवा” या “जानलेवा न होने वाले” हथियार के तौर पर बताया जाता है, लेकिन जब इन्हें भीड़ पर बहुत पास से चलाया जाता है, तो इनसे जानलेवा या गंभीर चोट लग सकती है, खासकर शरीर के ज़रूरी अंगों को नुकसान पहुँच सकता है। वे 20 जुलाई को हुई गोलीबारी में 19 साल के साहिल लोचब की आँख में लगी चोट का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जाने पर यह हथियार बेहद खतरनाक साबित होता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा ‘कम घातक हथियारों’ (less lethal weapons) के इस्तेमाल पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की गाइडलाइंस भीड़ को तितर-बितर करने के लिए ऐसे हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी देती हैं। इन गाइडलाइंस के अनुसार, मेटल पेलेट गन का इस्तेमाल “ज़रूरत, आनुपातिकता और तर्कसंगतता” के संवैधानिक मानदंडों पर खरा नहीं उतरता है।

यशोवर्धन आज़ाद के अलावा, 25 साल के आर्टिस्ट प्रशांत कुमार सिंह और 26 साल के शेख़ इरशाद मंसूरी भी इस मामले में याचिकाकर्ता हैं। प्रशांत सिंह का दावा है कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान RAF की ओर से बिना किसी उकसावे के की गई कथित पेलेट फायरिंग में वे घायल हो गए थे। वहीं, शेख़ इरशाद मंसूरी का कहना है कि वे वीज़ा से जुड़े काम के लिए कनॉट प्लेस गए थे और वहाँ पेलेट फायरिंग में घायल हो गए। उन्होंने दावा किया था कि संसद मार्च में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने छात्रों पर पैलेट गन चलाई थी।