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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हिंसाः प्रदर्शनकारियों के साथ झड़पों में 12 मौतें, PAK पुलिस के खिलाफ लंदन में उठी आवाज

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Peshawar: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा की आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक रूप ले चुका है। विभिन्न शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में कम से कम 12 लोगों के मारे जाने और 50 से अधिक लोगों के गिरफ्तार होने की खबरें सामने आई हैं। विवाद की जड़ हाल ही में आए उस न्यायिक फैसले को माना जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान में बसे जम्मू-कश्मीर मूल के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को संवैधानिक रूप से सुरक्षित बताया गया। अदालत ने कहा कि इन सीटों को बिना संवैधानिक संशोधन के समाप्त नहीं किया जा सकता। विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व Jammu Kashmir Joint Awami Action Committee (JAAC) से जुड़े समूह कर रहे हैं।

 

उनका कहना है कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों के कारण स्थानीय आबादी के राजनीतिक अधिकार प्रभावित होते हैं और बाहरी प्रभाव बढ़ता है। विशेष रूप से Rawalakot सहित कई शहरों में प्रदर्शन उग्र हो गए, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झड़पों में मारे गए लोगों में आम नागरिकों के साथ सुरक्षा बलों के कुछ सदस्य भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि स्वतंत्र स्रोतों से सभी आंकड़ों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। PoK में हुई घटनाओं का असर ब्रिटेन में बसे कश्मीरी प्रवासी समुदाय पर भी पड़ा है। लंदन में Pakistan High Commission London के बाहर प्रदर्शन आयोजित किए गए।
इसके अलावा Bradford, Birmingham और Manchester में भी पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने PoK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और बल प्रयोग पर चिंता जताई तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की। यह घटनाक्रम पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। आलोचकों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक समस्याओं और अधिकारों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई, तो यह विवाद केवल आरक्षित सीटों के मुद्दे तक सीमित न रहकर व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप भी ले सकता है।