नई दिल्ली: सरकार एक तरफ तो हर हाथ में बीमा कवर देखना चाहती है, लेकिन दूसरी तरफ बीमा कंपनियां ग्राहकों का भरोसा जीतने में नाकाम साबित हो रही हैं। हाल ही में वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़े एक डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं। आंकड़ों से साफ है कि लोग बीमा ले तो रहे हैं, लेकिन जब मदद की बारी आती है, तो कंपनियां हाथ खड़े कर लेती हैं।
लगातार बढ़ रहा है शिकायतों का ग्राफ
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में खुलासा किया कि पिछले तीन सालों में बीमा कंपनियों के खिलाफ शिकायतों की बाढ़ आ गई है। जहां 2022-23 में करीब 2 लाख शिकायतें थीं, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,57,790 तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन हजारों लोग अपनी इंश्योरेंस कंपनी से परेशान होकर IRDAI का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
कंपनियों की ‘ना’ के पीछे के 5 बड़े बहाने
पॉलिसीधारकों ने जो शिकायतें दर्ज कराई हैं, उनमें सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि समय पर क्लेम का पैसा नहीं मिल रहा। शिकायतों की मुख्य वजहें कुछ इस प्रकार हैं:
दावा निपटान में देरी: क्लेम फाइल करने के बाद महीनों तक कोई सुनवाई न होना।
बिना वजह रिजेक्शन: क्लेम को खारिज कर देना और ठोस कारण भी न बताना।
बेनिफिट्स पर रोक: ‘सर्वाइवल’ और ‘मैच्योरिटी’ का पैसा देने में आनाकानी करना।
भुगतान में कटौती: नुकसान की तुलना में कंपनी द्वारा बहुत कम मुआवजा तय करना।
शिकायतों की लिस्ट में कौन है टॉप पर?
हैरानी की बात यह है कि देश की सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली सरकारी कंपनी LIC शिकायतों के मामले में पहले पायदान पर है। स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी स्टार हेल्थ दूसरे नंबर पर है। नीचे दी गई टेबल से समझिए कि किन कंपनियों से ग्राहक सबसे ज्यादा खफा हैं:
रैंक बीमा कंपनी का नाम शिकायतों की संख्या (FY 2024-25)
1 LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम) 74,104
2 स्टार हेल्थ इंश्योरेंस 20,527
3 नेशनल इंश्योरेंस कंपनी 12,859
4 केयर हेल्थ इंश्योरेंस 10,281
5 यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस 10,126
6 नीवा बुपा हेल्थ इंश्योरेंस 7,970
7 ICICI लोम्बार्ड 7,781
8 न्यू इंडिया एश्योरेंस 7,768
9 HDFC एर्गो 7,326
10 ओरिएंटल इंश्योरेंस 6,854











