Punjabi News

इंडोनेशिया में सेना की आलोचना करने वाले एक्टिविस्ट पर एसिड अटैक, कोर्ट ने 4 सैन्य अधिकारी भेजे जेल

7

International Desk: इंडोनेशिया में मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील Andrie Yunus पर हुए तेजाब हमले के मामले में सैन्य अदालत ने चार सैन्य अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए जेल की सजा सुनाई है। यह मामला देश में सैन्य जवाबदेही और मानवाधिकारों को लेकर नई बहस का कारण बन गया है। मार्च में राजधानी Jakarta में हुए इस हमले में एंड्री यूनुस गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी दाहिनी आंख को स्थायी नुकसान पहुंचा था। अदालत के अनुसार, यूनुस पर उस समय हमला किया गया जब वह सेना के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव पर एक पॉडकास्ट रिकॉर्ड करने के बाद मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। हमलावरों ने उनके चेहरे पर हाइड्रोक्लोरिक एसिड फेंक दिया, जिससे उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया और आंख की रोशनी प्रभावित हुई।यूनुस मानवाधिकार संगठन KontraS के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और लंबे समय से सैन्य दंडमुक्ति तथा नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।

 

इंडोनेशियाई राष्ट्रीय सशस्त्र बल (Indonesian National Armed Forces की खुफिया इकाई से जुड़े चार अधिकारियों को अदालत ने दोषी पाया। सैन्य अदालत ने सार्जेंट एडी सुदार्को को 3 वर्ष की सजा, फर्स्ट लेफ्टिनेंट बुधी हरियांतो विधी चहयोनो को ढाई वर्ष की सजा, कैप्टन नंदाला द्वी प्रसत्य को 2 वर्ष की सजा और लेफ्टिनेंट सामी लक्का को 18 महीने की सजा सुनाई। अदालत ने सुदार्को और चहयोनो को सेना से बर्खास्त करने का भी आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश Fredy Isnartanto ने कहा कि आरोपियों ने अपने सैन्य दायित्वों के साथ विश्वासघात किया और उनके कृत्य ने इंडोनेशियाई सेना की छवि को नुकसान पहुंचाया। फैसले के तुरंत बाद मानवाधिकार संगठनों ने इसे अधूरा न्याय बताया। Amnesty International Indonesia ने कहा कि अपेक्षाकृत कम सजा और सीमित जांच से यह आशंका पैदा होती है कि मामले के पीछे मौजूद बड़े नेटवर्क को बचाया जा रहा है।

संगठन ने मांग की कि हमले की योजना बनाने, आदेश देने या वित्तीय सहायता देने वाले लोगों की भी पहचान कर उन्हें नागरिक अदालतों में पेश किया जाए।
Komnas HAM की जांच में संकेत मिले हैं कि यह हमला पूर्व नियोजित और समन्वित अभियान था, जिसमें चार आरोपियों से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। आयोग ने कहा कि इस घटना में सुरक्षा का अधिकार, यातना से मुक्ति का अधिकार और न्याय तक पहुंच जैसे कई मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि हमले में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।

 

यूनुस ने अप्रैल में शुरू हुए मुकदमे के दौरान अदालत में गवाही देने से इनकार कर दिया था। उनके प्रतिनिधियों के अनुसार, वह अभी भी त्वचा प्रत्यारोपण (स्किन ग्राफ्ट) सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं और उन्हें सैन्य अदालत की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है। हाल ही में दक्षिण जकार्ता की एक नागरिक अदालत ने पुलिस को मामले की आगे जांच जारी रखने का निर्देश भी दिया है ताकि अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जा सके। इस मामले ने इंडोनेशिया में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमलों की पुरानी घटनाओं की याद भी ताजा कर दी है। विशेष रूप से 2004 में मानवाधिकार कार्यकर्ता Munir Said Thalib की संदिग्ध हत्या का मामला फिर चर्चा में आ गया है। मुनिर को एम्स्टर्डम जाने वाली उड़ान में आर्सेनिक देकर मार दिया गया था और उस मामले के कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।