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सुप्रीम कोर्ट ने UPI चार्ज रोक लगाने से किया इनकार, 15 अक्टूबर से 2000 रु से ज्यादा के पेमेंट पर लगेगा फीस

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है कि इस नए नियम को लागू करने का आधार क्या है। बता दे कि 15 अक्टूबर से यह शुल्क 2000 रुपए से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने वकील अंजन दत्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “यह कानूनी मामला कम और तकनीकी मामला ज़्यादा है।”

एडवोकेट अंजन दत्ता ने जनहित याचिका में सवाल उठाया कि 2,000 रुपए की सीमा क्यों तय की गई? UPI और रूपे कार्ड के लिए नियम अलग क्यों हैं। याचिका में इसे रद्द करने की मांग की गई थी।

केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने बेंच को बताया कि आम लोगों के आपस में पैसे भेजने पर चार्ज नहीं लगेगा। देश के लगभग 96% छोटे-मोटे दुकानदारी वाले भुगतानों पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

वकील अंजन दत्ता की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) में केंद्र सरकार के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह लेवी बिना किसी उचित कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता या सार्वजनिक परामर्श के लागू की गई थी।

याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार ने जनता से चर्चा किए बिना और कोई ठोस नियम बनाए बिना ही यह फीस तय कर दी। इसके अलावा, ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ के एक नियम (धारा 10A) को भी अदालत में चुनौती दी गई। आरोप है कि यह नियम सरकार को अपनी मर्जी से यह फैसला करने की छूट देता है कि कौन-सा डिजिटल पेमेंट फ्री रहेगा और किस पर चार्ज लगेगा।

याचिकाकर्ता ने UPI ट्रांज़ैक्शन और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट के बीच के फ़र्क पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने बताया है कि इस नोटिफ़िकेशन में RuPay डेबिट कार्ड के लिए बिना किसी मॉनेटरी सीलिंग (पैसे की सीमा) के ‘नो-चार्ज प्रोटेक्शन’ को जारी रखा गया है।

0.4 प्रतिशत फ़ीस

लगभग छह साल तक पूरी तरह से मुफ़्त UPI पेमेंट की सुविधा के बाद, सरकार ने 15 अक्टूबर से UPI प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए मर्चेंट को 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांसफ़र पर 0.4 प्रतिशत फ़ीस लागू की है, जबकि आम लोगों के बीच होने वाले रोज़मर्रा के लेन-देन और छोटे पेमेंट को किसी भी तरह के चार्ज से पूरी तरह अलग रखा गया है।

पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफ़र – जो UPI के कुल ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम का 37 प्रतिशत और ट्रांज़ैक्शन वैल्यू का 70 प्रतिशत हिस्सा हैं – पर रकम चाहे कितनी भी हो, कोई चार्ज नहीं लगेगा।

MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय

₹75,000 और उससे ज़्यादा के पेमेंट के लिए MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की जाएगी।

ज़रूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टर – जैसे रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती से जुड़े सामान – में ₹2,000 से ज़्यादा के हर ट्रांज़ैक्शन पर ₹5 का फिक्स्ड MDR देना होगा।

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज़ और स्टॉकब्रोकर व डीलर के ज़रिए किए जाने वाले पेमेंट पर 0.02% MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा भी ₹300 होगी।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट समझिए

MDR वह फीस है, जो कोई दुकानदार या व्यापारी कार्ड या UPI से पेमेंट लेने की सुविधा इस्तेमाल करने के बदले बैंक और पेमेंट कंपनियों को देता है।

यह चार्ज पेमेंट सिस्टम और मशीनों को सही तरीके से चलाने के खर्च के लिए लिया जाता है। खास बात यह है कि यह फीस व्यापारी को देनी होती है, ग्राहक से नहीं ली जाती।