Punjabi News

‘कानून तोड़ा होगा तो फैसले रोक देंगे’: सुप्रीम कोर्ट का CEC ज्ञानेश को सस्पेंड करने से इनकार, चुनाव आयोग और केंद्र को जारी किया नोटिस

7

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 अक्टूबर) को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग वाली याचिका पर कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया । उन पर SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लेने का आरोप है।

हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर आरोपों पर उनका जवाब मांगा।

शीर्ष अदालत ने उस याचिका पर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले चुनाव पैनल के फैसलों के तरीके को चुनौती दी गई है; आरोप है कि ये फैसले दो चुनाव आयुक्तों की मंज़ूरी के बिना लिए गए थे। इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि अगर फैसले बिना सहमति के लिए पाए गए, तो उन्हें वापस लिया जा सकता है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने सीनियर वकील विकास सिंह की दलीलों पर ध्यान दिया और नोटिस जारी किया।

बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले या तो सर्वसम्मति से होने चाहिए या बहुमत से, और यह माना जाता है कि सभी फैसले इसी तरह लिए जाते हैं। कोर्ट ने कहा, “नोटिस के बाद, अगर वे आकर दिखाते हैं कि कोई फैसला सर्वसम्मति के बिना लिया गया था, तो हम उन फैसलों को वापस ले लेंगे।”

कोर्ट में क्या हुआ?

याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राकेश कुमार सिंह और सुधाकर सिंह की ओर से पेश हुए सीनियर वकील विकास सिंह ने दलील दी कि चुनाव आयोग कई सदस्यों वाली संस्था है और फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाने चाहिए।

सिंह ने CEC को सस्पेंड करने के लिए अंतरिम आदेश की मांग की और कोर्ट से आग्रह किया कि जब तक मामला लंबित है, तब तक फैसले सर्वसम्मति से या कम से कम बहुमत से लिए जाने का निर्देश दिया जाए।

सिंह ने कहा, “मेरी मांग है कि CEC को सस्पेंड किया जाए।”

सुप्रीम कोर्ट CEC को सस्पेंड नहीं कर सकता

संविधान में सुप्रीम कोर्ट को CEC को सस्पेंड करने की कोई स्पष्ट या विशेष शक्ति नहीं दी गई है। आर्टिकल 324 के तहत चुनाव कराने और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, लेकिन आयोग के फैसलों की कोर्ट में जांच हो सकती है। अगर कोई फैसला कानून या संविधान के खिलाफ पाया जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट उस पर रोक लगा सकता है या उसे रद्द कर सकता है।