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ईरान ने बढ़ाया होर्मुज पर नियंत्रण, IRGC की मंजूरी बाद 32 जहाजों को मिली एंट्री

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International Desk: ईरान की नौसेना ने दावा किया है कि 32 जहाजों का एक बेड़ा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की सुरक्षा मंजूरी और समन्वय के बाद रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक गुजर चुका है। ईरानी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, इन जहाजों में तेल टैंकर, कंटेनर शिप और अन्य व्यावसायिक पोत शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सामान्य आवाजाही को सीमित कर रखा है। वर्तमान में केवल चुनिंदा जहाजों को विशेष मंजूरी के बाद गुजरने दिया जा रहा है। IRGC अधिकारी हर जहाज की अलग-अलग जांच और सुरक्षा मंजूरी दे रहे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि तेहरान इस अहम समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

 

“टोल नहीं, सुरक्षा शुल्क”
इन घटनाक्रमों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि ईरान जहाजों से गुजरने के बदले शुल्क वसूल रहा है। हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इसे खारिज किया। उन्होंने कहा, “हम टोल वसूलने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। ईरान और ओमान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक प्रोटोकॉल विकसित कर रहे हैं।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि समुद्री सुरक्षा, निगरानी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाना “स्वाभाविक” है। ईरान ने बताया कि वह Oman के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने के लिए नया तंत्र विकसित कर रहा है।बघाई ने कहा कि दोनों देश इस जलमार्ग को “मुक्त व्यापार और सुरक्षित आवाजाही” के लिए खुला रखना चाहते हैं, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईरानी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अतीत में इस जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव और आक्रामकता के लिए किया गया।

 

 

यह टिप्पणी अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों की ओर इशारा मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक समुदाय की चिंताओं को भी ध्यान में रख रहा है। पिछले सप्ताह ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी और संचालन के लिए एक नई संस्था फ़ारस खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण(PGSA) की शुरुआत की थी। इस संस्था को समुद्री यातायात और सुरक्षा संचालन की निगरानी के लिए बनाया गया है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इसके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट की घोषणा की थी।दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।इसी वजह से यहां किसी भी तरह का तनाव या नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।