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ईरान में हिजाब और बुर्के का जाल: सुप्रीम लीडर का दोगलेपन बेनकाब ! शादी के वीडियो पर मचा बवाल

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International Desk: ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता पर पाबंदियाँ और कट्टरपंथी शासन का असर लगातार चर्चा में है। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने फिर से ईरानी शासन की दोहरी मानसिकता उजागर कर दी है। वीडियो में अयातुल्लाह खामेनेई के वरिष्ठ सहयोगी की बेटी को बिना आस्तीन की सफेद शादी की पोशाक में दिखाया गया, जबकि शासन महिलाओं को सख्त हिजाब और बुर्के में रहने के लिए मजबूर करता है। यह घटनाक्रम देश में व्यापक आक्रोश का केंद्र बन गया है।

 

खुमैनी और खामेनेई का पाखंड
1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी ने महिलाओं पर कड़े नियम लागू किए। उन्होंने बुर्के और हिजाब अनिवार्य किए, होंठों से लिपस्टिक हटाई, और महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति और स्वतंत्रता सीमित कर दी। खुमैनी के बाद अयातुल्लाह अली खामनेई ने उसी कट्टरपंथी परंपरा को आगे बढ़ाया।

महिलाओं के अधिकारों पर नियंत्रण
क्रांति से पहले ईरानी महिलाएं विश्वविद्यालय में पढ़ सकती थीं, पश्चिमी शैली के कपड़े पहन सकती थीं और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भाग ले सकती थीं। 1979 के बाद उन्हें घर के काम, दाई का काम और शिक्षण तक सीमित कर दिया गया। 1981 में हिजाब अनिवार्य कर दिया गया, तलाक और गर्भनिरोधक पर रोक लगाई गई, और लड़कियों की शादी की उम्र घटाकर 9 वर्ष कर दी गई।

 

विरोध और सोशल मीडिया पर आक्रोश
हालिया वीडियो ने दिखाया कि शासन और परिवार की प्राइवेट लाइफ के दोगलेपन पर जनता नाराज है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने शासन की आलोचना की। आलोचक इसे ईरान में महिलाओं के अधिकारों पर लंबे समय से लागू सख्ती और पाखंड का प्रतीक मान रहे हैं।

 

खुमैनी का तर्क
खुमैनी और खामनेई का तर्क रहा है कि समाज को “शुद्ध” रखना आवश्यक है और इसके लिए शासन द्वारा सख्त नियंत्रण और सजा जरूरी है। उन्होंने कहा कि जो लोग शासन के नियमों का उल्लंघन करते हैं, वे समाज में बुराई फैलाते हैं, और इस कारण उन्हें दंडित करना पड़ता है।