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भोजन-सुरक्षित भविष्य का निर्माण: नीति और भोजन का सुमेल

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*पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत न्यूट्रिशनल गार्डन, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जन जागरूकता की की समीक्षा*

*चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और अंतर-विभागीय समन्वय पर दिया गया जोर*

चंडीगढ़:आज पंजाब राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें स्कूलों में पोषण संबंधी बगीचों, स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों और पूरे राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत जागरूकता पहलों की प्रगति और क्रियान्वयन का मूल्यांकन किया गया।

 

बैठक में सरकारी स्कूलों में पोषण संबंधी बगीचों की स्थापना और कार्यशीलता का जायजा लिया गया ताकि बच्चों में खुराक विविधता को प्रोत्साहित किया जा सके और स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित की जा सकें। चेयरमैन ने जोर देते हुए कहा कि ये बाग मात्र प्रतीकात्मक नहीं रहने चाहिए बल्कि विद्यार्थियों को पोषण, टिकाऊ कृषि और खाद्य सुरक्षा के बारे में व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने चाहिए।

 

अधिकारियों को बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए मिड-डे मील तैयार करने में नियमित रखरखाव, रसोइयों की सफाई, रसोइयों के लिए उचित प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

 

स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में आयोग ने स्कूलों में स्वास्थ्य जांच, विकास की निगरानी और सफाई अभ्यासों के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की। चेयरमैन ने कुपोषण की शीघ्र पहचान और स्कूल स्तर पर पोषण संबंधी कमियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के बीच समन्वय आधारित कार्रवाई की महत्ता पर जोर दिया।

 

आयोग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रावधानों पर जागरूकता अभियान का भी मूल्यांकन किया, जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत अधिकार, शिकायत निवारण विधियां और खाद्य सुरक्षा मानक शामिल हैं। यह पाया गया कि पंचायती राज संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों और सामुदायिक भागीदारी की निरंतर पहुंच के माध्यम से यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि पात्र लाभार्थियों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जाए और उन्हें बिना किसी बाधा के लाभ प्राप्त हो। चेयरमैन ने जिला-स्तरीय अधिकारियों को आई.ई.सी. गतिविधियों को तेज करने और व्यापक प्रसार के लिए स्थानीय मीडिया, स्कूल तथा आंगनवाड़ी केंद्रों जैसे नवाचारपूर्ण माध्यमों को अपनाने के निर्देश दिए।

 

बैठक के समापन पर चेयरमैन ने उपरोक्त मुद्दों पर मासिक समीक्षा और जिला स्तर पर बैठकें करने पर जोर दिया तथा बताया कि शीर्ष 3 स्कूलों और आंगनवाड़ियों को राज्य स्तर पर मान्यता दी जाएगी।

 

चेयरमैन ने आगे दोहराया कि खाद्य सुरक्षा मानवीय सम्मान का अभिन्न अंग है और क्रियान्वयन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को मजबूत करने के लिए अंतर-विभागीय समन्वय तथा समयबद्ध रिपोर्टिंग की मांग की। उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की कि वे एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएं ताकि कोई भी बच्चा या परिवार उचित और पौष्टिक भोजन के अधिकार से वंचित न रहे।

 

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में आयोग के सदस्य विजय दत्त, जसवीर सिंह सेखों और सदस्य सचिव कनू थिंद सहित अन्य शामिल थे।