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‘गैंगस्टरां ते वार’ का 252वां दिन: पंजाब पुलिस ने 594 स्थानों पर छापेमारी कर 249 को किया काबू

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— पुलिस टीमों ने 182 व्यक्तियों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की

— लोग एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 के माध्यम से गुप्त रूप से गैंगस्टरों के बारे में कर सकते हैं सूचना साझा

— ‘ युद्ध नशों विरूद्ध ’ के 577वें दिन 10 किलोग्राम हेरोइन सहित 110 नशा तस्कर काबू

चंडीगढ़: राज्य में चलाए जा रहे अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ के 252वें दिन पंजाब पुलिस ने आज पूरे राज्य में गैंगस्टरों के सहयोगियों के चिन्हित और मैप किए गए 594 ठिकानों पर छापेमारी की।

उल्लेखनीय है कि ‘गैंगस्टरां ते वार—पंजाब को गैंगस्टर मुक्त राज्य बनाने के लिए निर्णायक लड़ाई’ अभियान पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव द्वारा 20 जनवरी, 2026 को शुरू किया गया था। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) पंजाब के समन्वय से सभी जिलों की पुलिस टीमें राज्यभर में विशेष अभियान चला रही हैं।

अभियान के 252वें दिन पुलिस टीमों ने छह हथियारों सहित 249 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही अभियान शुरू होने से अब तक गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की कुल संख्या 74,734 हो गई है।

इसके अतिरिक्त, पुलिस टीमों ने 182 व्यक्तियों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की। अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने चार भगोड़े अपराधियों को भी गिरफ्तार किया।

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 के माध्यम से वांछित अपराधियों और गैंगस्टरों के बारे में गुप्त रूप से सूचना दे सकते हैं। इसके अलावा अपराध तथा आपराधिक गतिविधियों से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी भी इस हेल्पलाइन के माध्यम से पुलिस तक पहुंचाई जा सकती है।

इस बीच, पंजाब पुलिस ने नशों के खिलाफ अपनी मुहिम ‘युद्ध नशों विरूद्ध ’ को 577वें दिन भी जारी रखते हुए 110 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 10.2 किलोग्राम हेरोइन, 500 ग्राम अफीम, 4 किलोग्राम गांजा, 19 किलोग्राम भुक्की, 543 नशीली गोलियां तथा 4 लाख रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई।

पुलिस के अनुसार, इस अभियान के 577 दिनों के दौरान गिरफ्तार किए गए नशा तस्करों की कुल संख्या 80,763 तक पहुंच गई है।
नशा मुक्ति अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने आज 22 व्यक्तियों को नशा मुक्ति एवं पुनर्वास उपचार करवाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उन्हें नशे की लत से बाहर निकालकर सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिल सके।