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Demat-Mutual Fund में बड़ा बदलाव, हर निवेशक को देना होगा नॉमिनी डिटेल, अनिवार्य होगा नियम

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बिजनेस डेस्क: निवेश की दुनिया में अक्सर हम मुनाफा तो देखते हैं, लेकिन ‘सुरक्षा’ का एक छोटा सा कॉलम खाली छोड़ देते हैं। इसी लापरवाही को खत्म करने के लिए बाजार नियामक SEBI (सेबी) एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है, जिससे भविष्य में आपकी मेहनत की कमाई कभी लावारिस नहीं रहेगी। सेबी की नई योजना के मुताबिक, अब डीमैट और म्यूचुअल फंड अकाउंट खोलने के लिए नॉमिनी (वारिस) का नाम देना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य शर्त बनने वाली है।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
अक्सर देखा गया है कि निवेशक जोश में खाता तो खोल लेते हैं, लेकिन नॉमिनी की जानकारी देना भूल जाते हैं। खुदा-न-खास्ता अगर निवेशक के साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो उसके परिवार को अपनी ही रकम पाने के लिए सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। सेबी का मानना है कि ‘डिफॉल्ट’ नॉमिनी का नियम आने से यह कागजी सिरदर्द खत्म हो जाएगा और परिवार को उनकी हक की राशि आसानी से मिल सकेगी।

क्या-क्या बदलने की तैयारी है?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अब खाता खोलते वक्त ही आपको अपने वारिस का नाम और रिश्ता बताना होगा। अच्छी बात यह है कि प्रक्रिया को बोझिल नहीं बनाया गया है; आपको नॉमिनी का पता या मोबाइल नंबर देने की सख्ती नहीं होगी, बस बुनियादी जानकारी काफी होगी। अब एक निवेशक अपने एक खाते में अधिकतम चार लोगों को नॉमिनी बना सकेगा। अगर आप यह तय नहीं करते कि किसे कितना हिस्सा मिलेगा, तो नियम के मुताबिक वह रकम चारों में बराबर बांट दी जाएगी। हालांकि, जो लोग अभी भी किसी को नॉमिनी नहीं बनाना चाहते, उन्हें एक लिखित डिक्लेरेशन देना होगा।

कब तक दिखेगा असर?
सेबी ने इस पूरी योजना पर जनता और जानकारों से 7 अप्रैल 2026 तक उनकी राय मांगी है। फीडबैक मिलने के बाद इन नियमों को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा। विशेषज्ञों की मानें तो यह कदम निवेशकों के हित में है, क्योंकि यह न केवल निवेश को सुरक्षित बनाता है बल्कि उत्तराधिकार की प्रक्रिया को भी बेहद सरल कर देता है।
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