चंडीगढ़(गम्भीर): पुष्पांजलि ट्रस्ट द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने पंजाब सरकार को 15 दिन के भीतर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल नियमों को अधिसूचित करने के लिए आदेश जारी किया।
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान नोट किया कि केंद्र से 17 अप्रैल को मंजूरी मिलने के बावजूद सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। खंडपीठ ने पंजाब, हरियाणा, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और केंद्र को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए और महत्वपूर्ण नियमों को बनाने और लागू करने में लंबे समय तक हुई देरी के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई। इस मामले में आगे की सुनवाई 18 मई को होगी।
न्यायालय ने मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों के पुनर्वास संबंधी बुनियादी ढांचे के प्रावधानों के अनुपालन की भी जांच की। जांच में सामने आया कि चंडीगढ़ में सैक्टर-31 में एक सामूहिक गृह है और हरियाणा ने रोहतक जिले में अस्थाई व्यवस्था की है, लेकिन पंजाब से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। खंडपीठ ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को ऐसे सुविधाओं की स्थिति का विस्तृत विवरण देते हुए हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने पी.जी.आई. चंडीगढ़ को निर्देश दिया कि वह पंजाब के प्रत्येक जिले में आवश्यकता-आधारित सर्वेक्षण आयोजित करने की समय-सीमा के बारे में सूचित करे और ऐसे सर्वेक्षण की वर्तमान स्थिति को दर्शाते हुए एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करे।













