बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने सोमवार (6 अप्रैल) को भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। शुरुआती सपाट शुरुआत के बाद कारोबार के दौरान बिकवाली हावी हो गई, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ती दिखी, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ती दिखी।
BofA ने घटाया निफ्टी का टारगेट
इस बीच, ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Goldman Sachs के बाद अब Bank of America (BofA) ने भी भारतीय बाजार को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। BofA ने दिसंबर 2026 तक के लिए निफ्टी का लक्ष्य 29,000 से घटाकर 26,200 कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि महंगाई और सुस्त ग्रोथ के चलते कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है।
BofA ने वित्त वर्ष 2027 के लिए निफ्टी अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान घटाकर 8.5% कर दिया है, जो पहले के अनुमानों से काफी कम है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं, तो भारत की GDP ग्रोथ 7.4% से घटकर 6.5% तक आ सकती है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, मौजूदा समय में बाजार पूरी तरह आकर्षक वैल्यूएशन पर नहीं है और करेक्शन के बावजूद जोखिम बना हुआ है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में कुछ तेजी संभव है।
सेक्टोरल रणनीति की बात करें तो BofA ने क्वालिटी और डिफेंसिव सेक्टर्स को प्राथमिकता दी है—खासकर वे सेक्टर जो जियोपॉलिटिकल तनाव के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
बर्नस्टीन ने भी घटाया निफ्टी का टारगेट
इसी बीच, Bernstein ने भी निफ्टी का टारगेट घटाकर 26,000 कर दिया है। उसका कहना है कि भले ही कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहे लेकिन पूरे साल कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा करेगा।
कुल मिलाकर, बाजार पर फिलहाल ग्लोबल अनिश्चितता, महंगाई और कमाई के दबाव का असर साफ दिख रहा है और निवेशकों को आने वाले समय में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।



















