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लैंड पूलिंग पॉलिसी के खिलाफ पटियाला में कांग्रेस का विशाल रोष प्रदर्शन

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अगर आप सरकार इसे वापस नहीं लेती, तो कांग्रेस लेगी: वड़िंग

पटियाला : पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि उनकी पार्टी लैंड पूलिंग पॉलिसी के खिलाफ किसानों की लड़ाई को उसके सही अंजाम तक पहुँचाएगी और सरकार को इसे वापस लेने के लिए मजबूर कर देगी।

उन्होंने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी सरकार ऐसा नहीं करती है, तो 2027 में बनने वाली कांग्रेस की सरकार इसे रद्द कर देगी।

यहां लैंड पूलिंग पॉलिसी के खिलाफ आयोजित एक विशाल रोष प्रदर्शन को संबोधित करते हुए, वड़िंग ने कहा कि यह आप सरकार की किसानों से जमीनें छीनने और बाद में अपनी विभिन्न योजनाओं के लिए उन जमीनों पर कर्ज़ लेने की एक छिपी हुई चाल है। जिन योजनाओं को वह लागू करने में विफल रही है।

उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि पंजाब पहले से ही 4.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के कर्ज़ के बोझ तले दबा हुआ है। उन्होंने कहा कि आप न केवल पंजाब को दिवालियेपन की ओर धकेल रही है, बल्कि 50,000 एकड़ ज़मीन पर कंक्रीट का जंगल बनाने की कोशिश कर रही है, जिसे उसे किसानों से जबरन छीनना है।

अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के अध्यक्ष और भुलत्थ से विधायक सुखपाल खैहरा के विचारों का समर्थन करते हुए, उन्होंने कहा कि कहीं भी कोई नया शहरी क्षेत्र बनाने की न तो कोई मांग है और न ही कोई ज़रूरत है।

वड़िंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और इसकी अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि राज्य को कृषि उपज से हर साल लगभग 80,000 करोड़ रुपये की आय होती है। ऐसे में अगर 50,000 एकड़ ज़मीन छीन ली जाती है, तो इससे पंजाब की अर्थव्यवस्था पर और भी बुरा असर पड़ेगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने इस मामले को संसद में भी उठाया है और केंद्र सरकार से अपील है कि वह डॉ. मनमोहन सिंह सरकार द्वारा पारित भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल करके राज्य सरकार को किसानों की ज़मीन जबरन न छीनने संबंधी निर्देश जारी करे।

इस अवसर पर बोलते हुए, सुखपाल सिंह खैहरा ने किसानों को कांग्रेस के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस नीति की कोई ज़रूरत नहीं है और कांग्रेस इसे लागू नहीं होने देगी।

इस अवसर पर अन्य के अलावा, विजय इंदर सिंगला, धर्मवीर गांधी, मोहित महिंद्रा, गुरशरण कौर रंधावा, साधु सिंह धर्मसोत, हरदियाल सिंह कंबोज, हैरी मान, किरनजीत सिंह मीठा, हरविंदर सिंह खनौरा, नरेश दुग्गल, दरबारा सिंह, विष्णु शर्मा आदि मौजूद थे।