इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की डेडलाइन खत्म होने से एक दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो अमेरिकी F-15E Strike Eagle पायलटों को बचाने के “ऐतिहासिक” मिशन की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा, “हम यहां मिलिट्री द्वारा किए गए सबसे बड़े, सबसे मुश्किल और सबसे खतरनाक कॉम्बैट सर्च-एंड-रेस्क्यू मिशनों में से एक की सफलता का जश्न मनाने के लिए हैं।” ट्रंप ने इस ऑपरेशन को “ऐतिहासिक और यादगार” बताया।
‘एक को बचाने के लिए 200 लोग…’ ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने कहा, “आप एक व्यक्ति को बचाने के लिए 200 जवान भेजते हैं यह आमतौर पर नहीं किया जाता, लेकिन हमने किया। इसमें कई बेहतरीन लोगों ने मदद की, इसका हिस्सा होना सम्मान की बात है।” उन्होंने बताया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को आदेश दिया था कि “हमारे बहादुर सैनिकों को घर लाने के लिए जो भी जरूरी हो, किया जाए।” ट्रंप ने माना कि यह फैसला बेहद जोखिम भरा था—“1-2 की जगह 100 लोगों की जान जा सकती थी, लेकिन अमेरिकी सेना किसी भी नागरिक को पीछे नहीं छोड़ती।”
पहला रेस्क्यू ऑपरेशन—21 एयरक्राफ्ट, गोलियों के बीच मिशन
ट्रंप के अनुसार, दोनों अमेरिकी एयरमैन विमान से बाहर निकलकर जिंदा ईरान में उतरे थे।
पहले चरण में 21 एयरक्राफ्ट सर्च-एंड-रेस्क्यू के लिए भेजे गए, दुश्मन की भारी फायरिंग के बीच घंटों उड़ान और एक हेलीकॉप्टर को कई गोलियां लगीं। इस टीम ने सफलतापूर्वक एक पायलट को ढूंढा और उसे HH-60 Pave Hawk हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
दूसरा मिशन—155 एयरक्राफ्ट, बड़े स्तर पर ऑपरेशन
दूसरे क्रू मेंबर, यानी वेपन सिस्टम ऑफिसर को खोजने के लिए और भी बड़ा ऑपरेशन चलाया गया। इस मिशन में 155 एयरक्राफ्ट,64 फाइटर जेट,48 रिफ्यूलिंग टैंकर और 13 रेस्क्यू विमान शामिल थे। ट्रंप ने बताया कि दो कार्गो प्लेन रेत में फंस गए थे, जिन्हें खुद ही नष्ट कर दिया गया ताकि दुश्मन के हाथ कोई जानकारी न लगे।
घायल होने के बावजूद जिंदा रहा ऑफिसर
ट्रंप के मुताबिक, वेपन सिस्टम ऑफिसर गंभीर रूप से घायल था और उसका काफी खून बह रहा था। इसके बावजूद वह पहाड़ी इलाके पर चढ़कर अपनी लोकेशन भेजने में सफल रहा और अमेरिकी सेना से संपर्क बनाए रखा।
दुश्मन के इलाके में घुसकर बचाया गया सैनिक
ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सेना ने “कौशल, सटीकता और ताकत” का शानदार प्रदर्शन करते हुए दुश्मन के इलाके में प्रवेश किया, दुश्मनों का सामना किया, फंसे हुए ऑफिसर को सुरक्षित निकाला और सभी खतरों को खत्म किया और बिना किसी नुकसान के ईरानी इलाके से बाहर निकल आए।
‘किसी को पीछे नहीं छोड़ते’—ट्रंप
ट्रंप ने इस मिशन को अमेरिकी सेना की बहादुरी और प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया और कहा कि यह दिखाता है कि अमेरिका अपने किसी भी नागरिक या सैनिक को कभी पीछे नहीं छोड़ता।











