बिजनेस डेस्कः 30 अप्रैल को बाजार खुलते ही भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिर कमजोर हो गया और 95 के स्तर के नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 95.21 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक के सबसे निचले स्तरों में से एक है।
गुरुवार को रुपया 95.02 प्रति डॉलर पर खुला, जो पिछले बंद भाव 94.84 के मुकाबले करीब 0.2% कमजोर था। इसके बाद गिरावट जारी रही और रुपया 95.27 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया, जो मार्च के पिछले रिकॉर्ड 95.22 से भी नीचे है।
क्यों कमजोर हो रहा है रुपया?
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
Brent Crude 122 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो तीन साल का उच्च स्तर है। वहीं West Texas Intermediate भी 110 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत की आयात निर्भरता ज्यादा होने के कारण तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपया दबाव में आता है।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
वैश्विक तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण विदेशी निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर में निवेश कर रहे हैं।
3. डॉलर की मजबूती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है।
4. आरबीआई की सीमित दखल
आरबीआई रुपए को संभालने के लिए हस्तक्षेप कर रहा है लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत डॉलर के सामने इसकी कोशिशें ज्यादा असरदार नहीं हो पा रही हैं।
आम लोगों पर असर
रुपए की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। विदेश यात्रा और पढ़ाई महंगी हो जाएगी। साथ ही, स्मार्टफोन, लैपटॉप जैसे आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।
इसके अलावा, तेल कंपनियों की लागत बढ़ने से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ने की आशंका है, जिससे महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है।















