Punjabi News

भाजपा के साथ गठबंधन के लिए इतने बेताब क्यों हैं सुखबीर? – राजा वड़िंग

13

हलकों के परिसीमन को लेकर सुखबीर के यू-टर्न पर कसा तंज

कहा: अकाली सुप्रीमो अब जरूरत से ज्यादा वफादार बनने की कोशिश कर रहे हैं

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल से पूछा कि वह भाजपा के साथ चुनावी गठबंधन के लिए इतने बेताब क्यों हैं कि उन्हें विधानसभा और लोकसभा हलकों के परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी अपना रुख बदलना पड़ा है।

इस मौके पर वड़िंग ने सुखबीर को याद दिलाते हुए, कहा कि महज तीन महीने पहले, अप्रैल में, उनकी पार्टी ने परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध किया था और इसे पंजाब के हितों के खिलाफ करार दिया था। उन्होंने पूछा कि फिर इन तीन महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि जिस विधेयक को आप पंजाब के हितों के खिलाफ बता रहे थे, अब उसी में आपको खूबियां नजर आने लगी हैं?

इस पर तंज कसते हुए, उन्होंने कहा कि सुखबीर ने बहुत कम समय में ही जरूरत से ज्यादा वफादार बनने की कोशिश शुरू कर दी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसके कारण बिल्कुल स्पष्ट हैं। अपनी राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए बेताब सुखबीर अब भाजपा को खुश करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, ताकि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के साथ चुनावी गठबंधन हो सके।

उन्होंने जोर देते हुए, कहा कि जब लोकसभा चुनावों से पहले अकाली दल भाजपा के साथ गठबंधन करने में असफल रहा था, तब सुखबीर ने दावा किया था कि वह पंजाब के हितों से समझौता नहीं करना चाहते हैं। वड़िंग ने सुखबीर को याद दिलाया कि अब जब आप अपना अस्तित्व बचाने के लिए इतने बेताब हैं कि आपने पंजाब के उन्हीं हितों को भुला दिया है, जिनके लिए आपने 2024 में स्टैंड लेने का दावा किया था।

उन्होंने कहा कि सुखबीर का राजनीतिक मौकासांसप्रस्ती वाला चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि भले ही अकाली दल और भाजपा चुनावों के लिए एक साथ आ जाएं, फिर भी उनकी जीत की कोई संभावना नहीं है। पंजाब के लोग न तो बेअदबी की घटनाओं को भूले हैं और न ही किसानों पर हुए अत्याचारों को भूले हैं। इन दोनों मामलों में दोनों पार्टियां सेक्रमशः जिम्मेदार रही हैं। इन दोनों पार्टियों के एक साथ आने से उनकी चुनावी संभावनाओं पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, बल्कि यह उनके राजनीतिक अवसरवाद को और उजागर करेगा।