Suvendu Adhikari Marriage: पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक जनसभा के दौरान बीजेपी नेता सुबेंदु अधिकारी ने अपने निजी जीवन को लेकर उठने वाले सवालों पर खुलकर बात की थी। मंच से भाषण देते हुए उन्होंने बताया कि अक्सर लोग उनसे पूछते हैं कि जब उनके भाई शादीशुदा हैं तो वे अब तक अविवाहित क्यों हैं। उन्होंने अपने जवाब में कहा था कि उनका जीवन पूरी तरह राजनीति और समाज सेवा को समर्पित रहा है, इसलिए उन्होंने विवाह न करने का फैसला लिया। सुबेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि वे खुद को आज के समय का अकेला व्यक्ति नहीं मानते, बल्कि उनका मानना है कि उनका पूरा राजनीतिक और सामाजिक दायित्व ही उनका परिवार है।
अविवाहित रहने के उनके निर्णय से पिता Sisir Adhikari काफी नाराज हुए थे। इस बात का खुलासा खुद शिशिर अधिकारी ने एक इंटरव्यू में किया था। उन्होंने बताया था कि जब शुभेंदु ने शादी नहीं करने का फैसला लिया, तब उन्होंने बेटे को काफी डांटा था। शिशिर अधिकारी के मुताबिक, गांव और समाज में आमतौर पर यही उम्मीद की जाती है कि बेटा बड़ा होकर शादी करेगा, परिवार बसाएगा और घर-परिवार आगे बढ़ाएगा। ऐसे में उनका नाराज होना स्वाभाविक था।
उन्होंने कहा था कि गुस्से में उन्होंने शुभेंदु को खूब डांटा, लेकिन बाद में उन्हें खुद भी खराब लगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने बेटे पर कभी हाथ नहीं उठाया। उनके मन में यही चिंता थी कि परिवार की विरासत, सम्मान और जिम्मेदारियां आगे कौन संभालेगा।
बाद में Suvendu Adhikari ने भी एक टीवी इंटरव्यू में अपने अविवाहित रहने की वजह बताई थी। उन्होंने कहा था कि वह साल 1987 से छात्र राजनीति से जुड़े हुए हैं और धीरे-धीरे पूरी तरह राजनीति को समर्पित हो गए।
शुभेंदु अधिकारी ने बताया था कि उनके क्षेत्र के तीन बड़े स्वतंत्रता सेनानी – Satish Samanta, Sushil Dhara और Ajoy Mukherjee – अविवाहित थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने भी बिना शादी किए सार्वजनिक जीवन को पूरी तरह समर्पित करने का फैसला किया।
उन्होंने कहा था कि अविवाहित रहने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें जनता के लिए ज्यादा समय मिलता है और पारिवारिक जिम्मेदारियां कम होने से पूरी ऊर्जा राजनीति और लोगों की सेवा में लगाई जा सकती है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने माता-पिता की देखभाल को अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं। शुभेंदु के मुताबिक, परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में लाकर सत्ता का फायदा उठाना सही नहीं है, इसलिए उन्होंने खुद को इसी रास्ते पर बनाए रखा।
















