Punjabi News

अमेरिका में बड़ा एक्शनः झूठ बोलने वाला भारतीय फंसा, नागरिकता छीनने की तैयारी

7

International Desk: भारतीय मूल का 62 वर्षीय एक व्यक्ति निवेशकों से धोखाधड़ी करने के कारण अमेरिकी नागरिकता रद्द किए जाने की कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहा है। वह 2012 में अमेरिकी नागरिक बना था और उसने निवेशकों से 25 लाख अमेरिकी डॉलर की धोखाधड़ी करने की साजिश रची तथा इस जानकारी को अमेरिकी संघीय अधिकारियों से छिपाया। देबाशीष घोष जन्म से अमेरिकी नागरिक नहीं था, लेकिन उसने बाद में कानूनी प्रक्रिया पूरी करके अमेरिका की नागरिकता प्राप्त कर ली थी। उसका अंतिम ज्ञात निवास इलिनोइस में कुक काउंटी बताया गया है।

 

वह 1991 से विभिन्न गैर-प्रवासी वीजा पर कई बार अमेरिका आया था और 2012 में अमेरिकी नागरिक बना। घोष उन 12 लोगों में शामिल है, जिनके खिलाफ अमेरिका के न्याय विभाग ने विभिन्न अदालतों में नागरिकता रद्द करने संबंधी मुकदमे दायर किए हैं। इन 12 लोगों पर आतंकवादी संगठन को समर्थन देने, युद्ध अपराध करने और नाबालिग के यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि अमेरिकी नागरिक बनने से पहले घोष ने विमान रखरखाव सुविधा के निर्माण के लिए निवेशकों से जुटाए गए 25 लाख डॉलर की धोखाधड़ी की साजिश रची थी। नागरिकता मिलने के बाद भी घोष धोखाधड़ी करता रहा और निवेशकों के धन की स्थिति को लेकर गलत जानकारी देता रहा। घोष ने 2012 में अपनी नागरिकता आवेदन प्रक्रिया और साक्षात्कार के दौरान दावा किया था कि उसने कभी कोई ऐसा अपराध नहीं किया जिसके लिए उसे गिरफ्तार किया गया हो।
घोष के खिलाफ दायर शिकायत में कहा गया है कि उसे नागरिकता रद्द किए जाने का सामना इसलिए करना पड़ रहा है क्योंकि जिस अवधि में उसे अच्छे नैतिक चरित्र का प्रमाण देना जरूरी था, उस दौरान उसने नैतिक भ्रष्टाचार से जुड़ा अपराध किया, गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा और अपने अपराध के बारे में झूठी गवाही दी। इसके अलावा, नागरिकता प्रक्रिया के दौरान घोष ने अपने अपराध से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया। आव्रजन और नागरिकता कानून के तहत यदि किसी व्यक्ति ने महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर या जानबूझकर गलत जानकारी देकर अमेरिकी नागरिकता हासिल की हो, तो उसकी नागरिकता रद्द की जा सकती है और उसका प्राकृतिक नागरिकता प्रमाणपत्र निरस्त किया जा सकता है।