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US-Iran डील से भारत को मिली बड़ी राहत, अंतरराष्ट्रीय बाजार में औंधे मुंह गिरा कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं सस्ते

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नेशनल डेस्क: अमेरिका और ईरान के लंबे समय से जारी सैन्य तनाव खत्म हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति की घोषणा की है। इस समझौते के तहत मध्य-पूर्व संकट के कारण बंद पड़े रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Hormuz Strait) से अमेरिकी नाकाबंदी हटाने और इसे फिर से खोलने को मंजूरी दे दी गई है। अमेरिका-ईरान के बीच हुआ यह शांति समझौता भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। आइए जानते हैं कि इस शांति समझौते से भारत और आम भारतीयों को क्या बड़े फायदे होने वाले हैं:

1. तेल और गैस संकट से मुक्ति

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी रूट से आता है। होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने से कच्चे तेल और गैस की निर्बाध सप्लाई शुरू हो जाएगी। समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है:

क्रूड ऑयल का प्रकार
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude)

5%

$83

डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude)

5.50%

$80

मर्बन क्रूड (Murban Crude)

7%

$77

2. पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) के दाम घटने की उम्मीद

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का सीधा फायदा आम भारतीय उपभोक्ताओं को मिल सकता है।

ईंधन की कीमतों में राहत: ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती कर सकती हैं।

सस्ता सिलेंडर: एलपीजी गैस की आपूर्ति सामान्य होने से घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दाम घट सकते हैं।

महंगाई पर लगाम: ईंधन सस्ता होने से माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) की लागत कम होगी, जिससे फल, सब्जी और खाने-पीने की अन्य जरूरी चीजें भी सस्ती हो सकती हैं।

3. शेयर बाजार में आई ‘रॉकेट’ जैसी तेजी

भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की खबरों का सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है। ट्रंप के इस शांति समझौते के ऐलान के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) खुलते ही रिकॉर्ड तेजी के साथ भागे। विशेष रूप से पेंट, एविएशन और टायर जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल देखा गया, जिनकी लागत सीधे कच्चे तेल से जुड़ी होती है। “वैश्विक तनाव के कारण डॉलर के मुकाबले 95 के पार पहुंच चुका भारतीय रुपया अब कच्चे तेल के दाम गिरने और देश का आयात बिल घटने से मजबूत स्थिति में लौट सकता है।”

4. खाड़ी देशों में रह रहे 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा

मध्य-पूर्व (Middle East) में युद्ध के कारण वहां रहकर रोजगार करने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और नौकरी पर बड़ा संकट मंडरा रहा था। एक अनुमान के मुताबिक, खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं। इस शांति समझौते से वहां स्थिरता आएगी, जिससे इन प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और उनके रोजगार का संकट भी टल जाएगा।