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SIR प्रकिया में नाम कटा, घर जाकर दस्तावेज लेंगे अफसर; विवाद के बाद चुनाव आयोग का फैसला

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नई दिल्ली: वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच, चुनाव आयोग ने कहा है कि जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, वे उन्हें फिर से जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अधिकारी ज़रूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करने के लिए घर-घर जाएंगे और उन्हें चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे।

यह फ़ैसला शनिवार को दिल्ली के निर्वाचन सदन में हुई एक बैठक में लिया गया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हुए। यह बैठक में SIR अभियान से जुड़े कुछ अहम फैसले लिए।

जिन लोगों को नाम मैप नहीं होने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण नोटिस भेजा गया है, बीएलओ उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। इन पर रीजनल इलेक्टोरल अफसर फैसला लेगा।

अब तक, SIR प्रक्रिया के दौरान अब तक 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के ड्राफ़्ट से 13.37 करोड़ नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, देश में 97.98 करोड़ से ज़्यादा वोटर हैं; इसका मतलब है कि SIR के दौरान लगभग 14% वोटरों के नाम हटा दिए गए।

यह बैठक तब हुई जब ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच चुनाव आयोग के फैसलों पर मतभेद का दावा किया जा रहा है।

बैठक में यह तय किया गया कि दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 30 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दी गई है। दिल्ली में 30 नवंबर तक और महाराष्ट्र में 10 नवंबर तक विवादों का निपटारा पूरा हो जाना चाहिए। गोवा में, जिन वोटरों के नाम छूट गए थे, उनके लिए ब्लॉक अधिकारी फ़ॉर्म-6 इकट्ठा करने के लिए घर-घर जाएंगे।

अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं है या छूट गया है, तो उसे शामिल करवाने का दावा फ़ॉर्म-6 का इस्तेमाल करके किया जाता है। आयोग ने कहा कि फ़ॉर्म-6 को लेकर कोई विवाद नहीं है; सुप्रीम कोर्ट ने फ़ॉर्म-6 को सही ठहराया है।