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अमेरिका में लोकसभा सीटें बढ़ाने पर भिडे़ भारतीय नेता: थरूर ने चीन से तुलना कर उड़ाया मजाक, तेजस्वी सूर्या ने दिया करारा जवाब

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International Desk: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि संसद के निचले सदन के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 850 करना एक “मज़ाक” है और इससे यह सदन चीन की पीपुल्स कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस का एक ‘देसी’ संस्करण बन जाएगा। हालांकि, भाजपा नेताओं ने उनके इस बयान का विरोध किया। रविवार को कैलिफ़ोर्निया में आयोजित ‘स्टैंडफोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026′ में भाग लेते हुए भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने कहा कि परिसीमन एक “लोकतांत्रिक आवश्यकता” है, ताकि निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने संसद की संरचना को स्थिर बनाए रखने को “बेतुका” बताया। लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 543 है। लोकसभा सदस्य तेजस्वी सूर्या ने थरूर के बयान का जवाब देते हुए कहा कि, ”1971 की जनसंख्या के आधार पर 2026 में 140 करोड़ लोगों वाले लोकतंत्र की आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने थरूर के उस उदाहरण का प्रतिवाद किया जिसमें उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस का उल्लेख किया था, जिसकी सदस्य संख्या 1929 से 435 ही बनी हुई है।

 

क्या बोले थरूर?
Shashi Tharoor ने कहा कि अमेरिका की जनसंख्या 1929 के बाद तीन गुना बढ़ चुकी है, लेकिन वहां प्रतिनिधि सभा के सदस्यों की संख्या अब भी 435 ही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस और चर्चा जरूरी होती है, जबकि 850 सांसदों वाले सदन में यह संभव नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना गलत है और अगर सरकार चाहे तो मौजूदा संसद में ही एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर सकती है। उन्होंने कहा, ”आपको बोलने, बहस करने या किसी भी बात पर चर्चा करने का मौका नहीं मिलेगा। 850 तो एक मज़ाक है।’ कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थरूर ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे को परिसीमन से नहीं जोड़ा जा सकता है और उनकी पार्टी लोकसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने पर समर्थन देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ”आज ही इसके लिए वोट करें। आप तत्काल वोट करा सकते हैं। इसे परिसीमन से न जोड़ें। आज की संसद में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करें और हम सभी इसके पक्ष में वोट करेंगे।”

 

भाजपा नेताओं ने किया पलटवार
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने थरूर के बयान का विरोध करते हुए कहा कि 1971 की जनसंख्या के आधार पर 140 करोड़ लोगों वाले देश की लोकतांत्रिक जरूरतें पूरी नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा कि आज आम नागरिक के लिए अपने सांसद तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया है क्योंकि एक सांसद 20 से 30 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। उनके मुताबिक परिसीमन केवल संवैधानिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतांत्रिक आवश्यकता है। भाजपा नेता और तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है, लेकिन जनसंख्या के आधार पर उत्तर भारत के राज्यों को स्वाभाविक रूप से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं।

 

“बड़े मोल-तोल” का मुद्दा बताया
अन्नामलाई ने इसे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच “बड़े मोल-तोल” का मुद्दा बताया। अन्नामलाई ने कहा दक्षिणी राज्य की कुल प्रजनन दर भारत में सबसे कम है और जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद, उत्तर भारतीय राज्यों को स्वाभाविक रूप से अधिक संख्या में सांसद मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, “अब यह उत्तर भारतीय राज्यों और दक्षिण भारतीय राज्यों के बीच एक बड़ा मोल-तोल है ताकि एक निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके और एक ऐसी संख्या पर पहुंचा जा सके जिसमें किसी को भी नुकसान न हो।” ये तीनों नेता ‘स्टैनफोर्ड इंडिया पॉलिसी एंड इकोनॉमिक क्लब’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में ‘इंडिया, यानी भारत: वृद्धि, शासन और पहचान’ शीर्षक वाले सत्र में भाग ले रहे थे।

 

क्यों अहम है परिसीमन?
भारत में परिसीमन का मतलब जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण करना है। 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा लंबे समय से स्थिर रखा गया था ताकि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान न हो। अब नई जनगणना और बढ़ती आबादी के बीच यह मुद्दा फिर गरमा गया है। थरूर ने कहा, ”संभवतः 2034 के चुनाव के समय तक, राजनीतिक रूप से भारत का एक नया नक्शा होगा। लगभग 2027 और 2034 के बीच, अगले 50 वर्षों के लिए इस देश के भविष्य के स्वरूप के बारे में गहन चर्चा करने की आवश्यकता है।”