बिजनेस डेस्कः सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। इसकी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों ने सप्लाई शॉक की आशंका कम कर दी, जिससे तेल बाजार का रुख पूरी तरह बदल गया। हाल के दिनों में युद्ध और सैन्य कार्रवाई के डर से क्रूड ऑयल छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था लेकिन अब यह चिंता कुछ हद तक कमजोर पड़ती दिख रही है।
क्यों टूटा कच्चा तेल
ग्लोबल ऑयल मार्केट में सोमवार को गिरावट का सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का बयान रहा। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं बन रही हैं और हालात सीधे टकराव की ओर नहीं बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पहले भी चेतावनी देते रहे हैं कि अगर ईरान न्यूक्लियर डील पर नहीं आया या देश के भीतर विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती जारी रखी गई, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। ईरान का दावा है कि ये विरोध प्रदर्शन पश्चिमी देशों के उकसावे से हो रहे हैं। हालांकि शनिवार को ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान अमेरिका से “गंभीरता से बातचीत” कर रहा है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि बातचीत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इन संकेतों ने तेल बाजार को राहत दी।
छह महीने की तेजी के बाद बदला रुख
हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, क्योंकि आशंका बनी हुई थी कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। पिछले हफ्ते अमेरिका ने ईरान की ओर भारी सैन्य तैनाती भी की थी, जिससे टकराव की आशंका और बढ़ गई थी लेकिन सोमवार को तस्वीर बदलती नजर आई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.4 फीसदी तक गिरकर 66.15 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। बाद में भी इसमें करीब 4.41 फीसदी की कमजोरी बनी रही। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स 4.75 फीसदी गिरकर 62.11 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
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