
पंचकूला: बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धन डायवर्जन मामले में गिरफ्तार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को विशेष सीबीआई अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद सीबीआई ने उन्हें अदालत में पेश किया। जांच एजेंसी ने दावा किया कि सरकारी धन के कथित गबन और बैंक खातों के संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है तथा मामले की जांच अभी जारी है।
सीबीआई की ओर से अदालत में दाखिल अर्जी में कहा गया कि हरियाणा सरकार से अनुमति मिलने के बाद पंकज अग्रवाल की भूमिका की जांच की गई। जांच में सामने आया कि संबंधित अवधि के दौरान वह हरियाणा सरकार में प्रधान सचिव, स्कूल शिक्षा तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी से रिभव ऋषि और राजेश सांगवान की मुलाकातों तथा कथित फर्जी लेनदेन की जानकारी मिलने के बाद उठाए गए कदमों को लेकर भी सवाल पूछे गए। सीबीआई का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया और कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं। एजेंसी के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों के संबंध में वह कोई संतोषजनक और तार्किक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। जांच एजेंसी के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पंकज अग्रवाल को 22 जून की रात चंडीगढ़ स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें पुलिस रिमांड पर भेजा था।
डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों से कराया सामना
सीबीआई के मुताबिक रिमांड के दौरान पंकज अग्रवाल से कई अहम दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ की गई। इनमें सह-आरोपियों के साथ संबंध, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में नया खाता खोलने से संबंधित फाइल, अधीनस्थ अधिकारियों को दिए गए निर्देश, वित्त विभाग के पंकज अग्रवाल परिपत्र, बैंक खाता खोलने के लिए संशोधित नोटशीट, मोबाइल संदेश और अन्य दस्तावेज शामिल रहे।
















