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RBI ने 57 साल पुरानी लीड बैंक योजना में किए बदलाव, छोटे कारोबारियों और किसानों को होगा फायदा

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बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 जून से 57 साल पुराने लीड बैंक योजना (Lead Bank Scheme) में कई बदलाव किए हैं। केंद्रीय बैंक का कहना है कि बदलती अर्थव्यवस्था, डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजना को आधुनिक बनाने की आवश्यकता थी।

नई गाइडलाइंस का उद्देश्य छोटे कारोबारियों, किसानों, महिला उद्यमियों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय सहायता को अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

क्या है लीड बैंक योजना?
लीड बैंक योजना की शुरुआत साल 1969 में की गई थी। इसके तहत प्रत्येक जिले में प्रमुख बैंक को जिम्मेदारी दी जाती है कि वह बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करे और लोगों तक लोन और दूसरी वित्तीय सुविधाएं पहुंच सकें। अब आरबीआई ने इसी पुराने सिस्टम को नए दौर के हिसाब से अपडेट किया है।

नई गाइडलाइंस की प्रमुख बातें
MSME और छोटे कारोबारियों पर विशेष फोकस
बैंकों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के लिए ऋण उपलब्धता बढ़ाने और लोन प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों में नए व्यवसाय शुरू करने वालों को मदद मिल सकेगी।

कृषि क्षेत्र के लिए भी काफी कुछ

आरबीआई ने बैंकों को किसानों तक ज्यादा पहुंच बनाने, कृषि लोन बढ़ाने और ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाएं मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

डिजिटल सेवाओं पर फोकस

नई व्यवस्था के तहत गांवों और दूरदराज इलाकों में डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान और वित्तीय जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इसका मकसद लोगों को बैंक शाखा पर निर्भरता कम कर डिजिटल सुविधाओं से जोड़ना है।

जिला स्तर पर बेहतर निगरानी

नई गाइडलाइंस के तहत जिला स्तर पर बैंकिंग योजनाओं की मॉनिटरिंग और मजबूत की जाएगी। इससे यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस इलाके में किस तरह की वित्तीय जरूरत ज्यादा है।

महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को समर्थन

बैंकों को बिजनेस वुमन, स्टार्टअप्स और नए बिजनेस शुरू करने वाले लोगों को ज्यादा वित्तीय सहायता देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, इससे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।