नेशनल डेस्क। केरल औषधि नियंत्रण विभाग ने राज्य में कई दवाओं एवं सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि मई में राज्य की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में किए गए गुणवत्ता परीक्षण में वे निम्न गुणवत्ता वाले पाए गए थे। राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. एम.एन. सुजीत कुमार ने कहा कि प्रभावित उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं इसलिए केरल में उनकी बिक्री एवं वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
उन्होंने चिन्हित बैचों का स्टॉक रखने वाले व्यापारियों, वितरकों, फार्मेसियों और अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत उन्हें अपने आपूर्तिकर्ताओं को लौटा दें और संबंधित जिला औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों को विवरण की सूचना दें। निम्न गुणवत्ता वाले घोषित उत्पादों में उत्तराखंड स्थित यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा निर्मित फोलिक एसिड टैबलेट आईपी 0.4 मिलीग्राम के दो बैच शामिल हैं और दोनों सितंबर 2027 तक वैध हैं।
उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा निर्मित एस्पिरिन गैस्ट्रो-रेसिस्टेंट टैबलेट आईपी 75 मिलीग्राम के दो बैट हैं जिनकी समाप्ति तिथि सितंबर 2026 है और उनपर प्रतिबंध लगा दिया गया है। औषधि नियंत्रण विभाग ने केरल स्टेट ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (केएसपीडी), अलाप्पुझा द्वारा निर्मित डाइक्लोफेनाक सोडियम टैबलेट आईपी 50 मिलीग्राम और टेल्मिसाटर्न टैबलेट आईपी 40 मिलीग्राम के दो बैचों में भी गुणवत्ता संबंधी खामियां पाईं।
प्रभावित बैच डाइक्लोफेनाक के लिए डीजी 5031 और टेल्मिसाटर्न के लिए टीएम 5144 और टीएम 5142 हैं। इसके अलावा, सिप्ला लिमिटेड, बद्दी, हिमाचल प्रदेश द्वारा निर्मित और डोम्पार के नाम से विपणन की जाने वाली पैरासिटामोल और डोम्पेरिडोन टैबलेट को भी निम्न गुणवत्ता का घोषित किया गया।
राज्य औषधि नियंत्रक ने कहा कि यह कारर्वाई विभाग के चल रहे निगरानी एवं गुणवत्ता-निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत की गई है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनता को केवल सुरक्षित एवं प्रभावी दवाएं और स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद ही उपलब्ध हों। उन्होंने सभी हितधारकों से आदेश का सख्ती से पालन करने और जन स्वास्थ्य के हित में प्रभावित बैचों को बिना किसी देरी के प्रचलन से हटाने का आग्रह किया।











