International Desk: अंतर्राष्ट्रीय अपराध अदालत (ICC) के मुख्य अभियोजक करीम खान को यौन दुराचार के आरोपों के चलते सोमवार देर रात उनके दायित्वों से निलंबित कर दिया गया। यह अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के इतिहास में अभूतपूर्व कदम माना जा रहा है। यह कदम अदालत के एक जांच निकाय द्वारा खान के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने के बाद उठाया गया। 56 वर्षीय ब्रिटिश बैरिस्टर करीम खान पर उनकी एक महिला सहयोगी के साथ कथित यौन दुराचार करने के आरोप हैं।
यह मामला पिछले दो वर्षों से अधिक समय से विवाद का विषय बना हुआ है। खान ने लगातार सभी आरोपों से इनकार किया है। खान के भविष्य पर अंतिम निर्णय अब ICC की निगरानी संस्था ‘असेंबली ऑफ स्टेट्स पार्टीज’ को लेना है। यह संस्था विशेष बैठक बुलाकर तय करेगी कि खान वैश्विक न्यायालय में अपने पद पर बने रह सकते हैं या नहीं। ‘असेंबली ऑफ स्टेट्स पार्टीज’ के ब्यूरो, जो न्यायालय की निगरानी संस्था की कार्यकारी समिति है, ने एक बयान में कहा कि उसका निर्णय ”यूनाइटेड नेशन्स ऑफिस ऑफ इंटरनल ओवरसाइट सर्विसेज’ द्वारा की गई जांच रिपोर्ट, उससे संबंधित साक्ष्यों, न्यायिक विशेषज्ञों के एक तदर्थ पैनल की सलाह और लिखित प्रस्तुतियों” पर आधारित है।
बयान में कहा गया कि असेंबली की बैठक तक खान का निलंबन ”अंतिम परिणाम का संकेत नहीं है।” टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर खान की कानूनी टीम ने कहा कि इस संबंध में मंगलवार को बयान जारी किया जाएगा। खान मई 2025 में जांच पूरी होने तक अस्थायी रूप से अपने पद से अलग हो चुके थे। आईसीसी के इतिहास में यह पहली बार है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है और इसके लिए ”असेंबली ऑफ स्टेट्स पार्टीज” को बार-बार नए प्रक्रियागत नियम बनाने पड़े हैं। खान के खिलाफ आरोप पहली बार दो वर्ष से अधिक समय पहले अदालत की स्वतंत्र निगरानी इकाई के समक्ष लाए गए थे।











