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590 Crore Scam: भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ेगी CBI, बैंकिंग ट्रांजेक्शन का सरकारी फाइलों से होगा मिलान

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चंडीगढ़ : आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा के सरकारी खाते से जुड़े 590 करोड़ के घोटाले में सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा की जांच तेजी से बढ़ रही है। जांच एजेंसी का पूरा फोकस अब उस नेक्सस को तोड़ना है जिसने हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड, शिक्षा बोर्ड और पावर कॉर्पोरेशन के फंड को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। सीबीआई अब बैंकिंग ट्रांजेक्शन का सरकारी फाइलों से मिलान कराएगी ताकि भ्रष्टाचार की हर परत को हर परत को उधेड़ा जा सके। एसीबी ने न्यायिक हिरासत के दौरान कुछ नए सबूत जुटाए हैं। जिनको सीबीआई ने आधार बनाया है।

वहीं किस अधिकारी ने फाइल आगे बढ़ाने के बदले कितना कमीशन लिया और पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है। किसको कितना पैसा दिया और किसने कितना गोल्ड लिया। इस एंगल पर भी सीबीआई जांच कर रही है। इसके अलावा पंचकूला और चंडीगढ़ के नामी ज्वैलर्स और बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ जारी है।

घोटाले की आंच अब विभाग के रसूखदारों तक पहुंच गई है। एचपीजीसीएल के डायरेक्टर फाइनेंस अमित दीवान, मार्केटिंग बोर्ड के कंट्रोलर फाइनेंस राजेश सांगवान और शिक्षा बोर्ड के रणधीर सिंह की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अमित दीवान को अंतरिम बेल के बाद 26 अप्रैल को सरेंडर करने के आदेश थे जिसके बाद सीबीआई 5 दिन का रिमांड हासिल करना चाहती है।