International Desk: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि वह बहुत जल्द अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के अगले दौर की मेजबानी करेगा। शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की भी तारीफ की और कहा कि ट्रंप क्षेत्र में शांति लाने के लिए “असाधारण प्रयास” कर रहे हैं।प्रधानमंत्री शरीफ इस समय चीन यात्रा पर हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि हालिया बातचीत में क्षेत्रीय हालात और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
शरीफ ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल Asim Munir के प्रयासों की भी जमकर सराहना की। मुनीर शनिवार तक तेहरान में मौजूद थे, जहां उन्होंने ईरान के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत की। इन चर्चाओं में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया में तनाव कम करने पर फोकस रहा। इसी बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका, ईरान और अन्य देशों के बीच एक बड़ा समझौता “काफी हद तक तय” हो चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी अंतिम बिंदुओं पर चर्चा जारी है। ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने सऊदी अरब, कतर, तुर्किये, यूएई, जॉर्डन और पाकिस्तान समेत कई देशों के नेताओं से फोन पर बातचीत की है। उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) से भी अलग से बात की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान वार्ता में सबसे बड़े मुद्दे ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। युद्ध और तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में तेल संकट और महंगाई बढ़ी। ट्रंप ने कहा कि संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना भी शामिल है। हालांकि ईरान और पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर अभी खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की है। कई विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संपर्क बनाए हुए है, इसलिए वह मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। पिछले महीने इस्लामाबाद में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ता भी हुई थी, जिसे 1979 के बाद अपनी तरह की पहली बड़ी बातचीत माना गया। हालांकि उस दौर में कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया था।
















