बिजनेस डेस्कः दुनिया भर के कमोडिटी बाजार में इस समय सबसे ज्यादा अनिश्चितता चांदी को लेकर बनी हुई है। कुछ ही घंटों में करीब 10% की गिरावट, फिर अचानक तेज उछाल और उसके बाद फिर से कमजोरी इन उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कमजोर लिक्विडिटी, चीन की घटती खरीदारी और बढ़ती सट्टेबाजी के कारण चांदी 1980 के बाद सबसे ज्यादा अस्थिर मेटल बन गई है।
एशियाई कारोबार के दौरान स्पॉट चांदी एक समय 6.2% तक चढ़ गई, जबकि इससे पहले कीमतें करीब 64 डॉलर प्रति औंस तक फिसल चुकी थीं। यह तेज मूवमेंट इस बात का संकेत है कि बाजार फिलहाल किसी मजबूत सपोर्ट लेवल पर टिक नहीं पा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी का बाजार आकार छोटा और लिक्विडिटी सीमित होने के कारण इसमें उतार-चढ़ाव हमेशा ज्यादा रहता है लेकिन इस बार हालात सामान्य से कहीं ज्यादा गंभीर हैं। हालिया मूवमेंट को 1980 के बाद का सबसे खतरनाक उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। सट्टेबाजी के दबाव और ओवर-द-काउंटर ट्रेडिंग में कमी ने अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
जनवरी के आखिर में बने ऑल-टाइम हाई के बाद से चांदी अपनी कीमत का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा गंवा चुकी है। Saxo Bank के कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, वोलैटिलिटी बढ़ने पर मार्केट मेकर्स स्प्रेड बढ़ा देते हैं और जोखिम लेने से बचते हैं, जिससे बाजार में सबसे जरूरी समय पर लिक्विडिटी कम हो जाती है और गिरावट तेज हो जाती है।
अचानक आई भारी गिरावट
पिछले कुछ वर्षों से कीमती धातुओं में जारी बुल रन को पिछले महीने और गति मिली थी, जिसमें जियोपॉलिटिकल जोखिम, अमेरिकी फेड को लेकर चिंताएं और चीन की सट्टा खरीदारी बड़ी वजह रही। निवेशकों ने लीवरेज्ड ईटीपी और कॉल ऑप्शन के जरिए भारी पोजिशन बनाई थीं लेकिन पिछले हफ्ते अचानक आई भारी गिरावट ने तेजी की रफ्तार तोड़ दी।
चीन की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। हाल के दिनों में वहां से चांदी की खरीद में तेज गिरावट आई है, जिससे बाजार को नीचे मजबूत सपोर्ट नहीं मिल पाया। Shanghai Futures Exchange के आंकड़ों के मुताबिक, ओपन इंटरेस्ट चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो निवेशकों के पोजिशन बंद करने का संकेत देता है।
सोने का बाजार चांदी के मुकाबले ज्यादा लिक्विड
इसके अलावा, 16 फरवरी से शुरू होने वाली लूनर न्यू ईयर छुट्टियों से पहले निवेशक हल्की पोजिशन रखना पसंद कर रहे हैं, जिससे बाजार में तरलता और कमजोर हो गई है। Fidelity International और PIMCO के अनुसार, सोने का बाजार चांदी के मुकाबले ज्यादा लिक्विड है, इसलिए उसने हालिया झटके को बेहतर तरीके से संभाला। हालांकि, कई बड़े फंड मैनेजर अब भी सोने के लिए लंबी अवधि का नजरिया सकारात्मक बता रहे हैं, जबकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि में बिटकॉइन सोने के मुकाबले ज्यादा आकर्षक विकल्प बन सकता है।
ताजा कारोबार में चांदी करीब 4.5% चढ़कर 74.09 डॉलर प्रति औंस पर रही, जबकि सोना 1.7% की तेजी के साथ 4,860.27 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं प्लेटिनम और पैलेडियम में कमजोरी देखी गई। कुल मिलाकर, 1980 के बाद पहली बार चांदी इतना अस्थिर और जोखिम भरा ट्रेड बन गई है, जहां मुनाफे से ज्यादा डर और अनिश्चितता निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।


















