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Shimla: नववर्ष से पहले 1000 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही हिमाचल सरकार

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शिमला (भूपिन्द्र): नववर्ष से पहले हिमाचल सरकार ने राज्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 1000 करोड़ रुपए का कर्ज लेने का निर्णय लिया है। सरकार यह ऋण विभिन्न विकास कार्यों, चालू योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय दायित्वों के निर्वहन के लिए ले रही है। कर्जा लेने के संबंध में राज्य के वित्त विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। यह ऋण 15 वर्ष की अवधि के लिए लिया जाएगा, जिसकी नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा करवाई जाएगी।

अधिसूचना के अनुसार सरकार द्वारा जारी की जाने वाली यह सरकारी प्रतिभूति 31 दिसम्बर, 2025 से प्रभावी होगी और ऋण की अदायगी 31 दिसम्बर, 2040 को की जाएगी। ऋण की राशि का उपयोग राज्य के विकास कार्यक्रमों पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार की सहमति भी संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत प्राप्त कर ली गई है। सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी 30 दिसम्बर, 2025 को आरबीआई के मुंबई स्थित कार्यालय में आयोजित की जाएगी।

बोली प्रक्रिया ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से पूरी की जाएगी। सरकार का तर्क है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कर्ज लेना मजबूरी है और इसका उपयोग केवल जरूरी एवं उत्पादक कार्यों के लिए किया जाएगा। सरकार का दावा है कि राजस्व बढ़ाने और खर्चों पर नियंत्रण के प्रयास भी जारी हैं। देखा जाए तो मौजूदा समय में कर्ज लेने की सीमा नहीं बढ़ाए जाने से राज्य सरकार को परेशानी आ रही है। हालांकि 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष में हालात के सामान्य होने की संभावना है। सूचना के अनुसार वर्तमान में प्रदेश पर 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है।

विपक्ष सरकार के कर्जा लेने पर उठाता रहा है सवाल

विपक्ष राज्य सरकार के कर्जा लेने के फैसले पर सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का कहना है कि लगातार कर्ज लेने से राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर होती जा रही है और इसका बोझ आने वाले वर्षों में जनता पर पड़ेगा। विपक्ष ने सरकार से कर्ज के उपयोग को लेकर पारदर्शिता बरतने की मांग की है।