
Prince Narula and Yuvika Chaudhary Divorce Rumours : टीवी इंडस्ट्री के मशहूर कपल प्रिंस नरूला और युविका चौधरी अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी सुर्खियों में हैं। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर उनके तलाक की खबरें लगातार चर्चा का विषय बनी रहीं। अब आखिरकार दोनों ने दिन अफवाहों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सच्चाई सामने रखी है। नेहा धूपिया और अंगद बेदी के चाट शो डबल डेट में पहुंचे इस कपल ने बताया कि आखिर कैसे एक छोटी-सी गलतफहमी ने लोगों के बीच तलाक की अफवाहों को जन्म दे दिया। बातचीत के दौरान दोनों ने प्रेग्नेंसी, बेटी के जन्म के बाद आए भावनात्मक उतार-चढ़ाव और अपने रिश्ते के मुश्किल दौर को लेकर भी खुलकर बात की।
एक बयान से उड़ने लगी थीं तलाक की अफवाहें
प्रिंस नरूला ने बताया कि तलाक की अफवाहें एक बड़ी ग़लतफहमी की वजह से फैली थीं। उन्होंने कहा कि उनके एक व्लॉग में कही गई बात को लोगों ने गलत तरीके से समझ लिया। उस समय वह नए घर के निर्माण और अपने दोनों को लेकर काफी व्यस्त थे। उनकी इच्छा थी कि उनका बच्चा सबसे पहले नए घर में ही आए। लेकिन घर में चल रहे रेनोवेशन के कारण घुल-मिट्टी काफी थी, जिससे युविका की सेहत पर असर पड़ सकता था। इसी वजह से उन्होंने युविका को कुछ समय के लिए उनके मायके में रहने की सलाह दी।
प्रिंस ने आगे बताया कि व्लॉग में जब उन्होंने कहा था कि हम साथ नहीं रहते तो उनका मतलब सिर्फ इतना था कि वे कुछ समय के लिए अलग-अलग घरों में रह रहे हैं न की उनका रिश्ता टूट गया है। हालांकि इस ब्यान को लोगों ने तलाक से जोड़ दिया और तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं। कपल ने माना कि शुरुआत में इन खबरों ने उन्हें परेशान किया लेकिन बाद में उन्होंने फैसला किया कि हर अफवाह का जवाब देना जरुरी नहीं होता और अपने रिश्ते को लेकर उन्हें किसी को सफाई देने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं है।
पोस्टपार्टम के बाद युविका का छलका दर्द
युविका चौधरी ने मां बनने के बाद के दौर को याद करते हुए बताया कि डिलीवरी के बाद उनकी जिंदगी में कई बड़े शारीरिक और मानसिक बदलाव आए। उन्होंने कहा कि यह समय उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि शरीर में आए बदलाव और बढ़ते वजन की वजह से उनका आत्मविश्वास काफी प्रभावित हुआ। वह अंदर ही अंदर कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजर रही थीं और खुद को संभालना आसान नहीं था।
युविका ने आगे कहा कि पोस्टपार्टम का दौर ऐसा होता है, जब व्यक्ति बाहरी दुनिया से ज्यादा अपनी भावनाओं और मानसिक संघर्षों से जूझ रहा होता है। ऐसे समय में अक्सर उम्मीद होती है कि कोई आपकी भावनाओं को समझे और आपका साथ दे, लेकिन आखिरकार इस मुश्किल सफर से हर महिला को खुद ही गुजरना पड़ता है। यह एक बेहद निजी और भावनात्मक अनुभव होता है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।













