International Desk: भारत ने अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए इजरायल की IAI और HAL के साथ लगभग 1.1 अरब डॉलर की बड़ी डील की है जिससे भारत-इजरायल रणनीतिक दोस्ती में एक नया अध्याय जुड़ गया है। इसके तहत छह Boeing 767 विमानों को आधुनिक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर में बदला जाएगा। इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति के तहत जबरदस्त मेगा डील माना जा रहा है जिससे भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक मार करने और हवा में ईंधन भरने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी को मजबूती
इजरायली कंपनी IAI पिछले कई वर्षों से भारत के साथ रक्षा तकनीक पर काम कर रही है। मार्च 2024 में कंपनी ने नई दिल्ली में अपनी भारतीय शाखा Aerospace Services India (ASI) शुरू की थी। यह कंपनी भारत की सरकारी रक्षा अनुसंधान एजेंसी DRDO के साथ मिलकर भारतीय सेना के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। ASI में करीब 97 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय हैं। MRSAM सिस्टम भी बना रहा है IAI । IAI और DRDO मिलकर भारत के लिए Medium Range Surface-to-Air Missile (MRSAM) सिस्टम भी बना चुके हैं। यह अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों इस्तेमाल कर रही हैं।
इस सिस्टम में एडवांस रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, मोबाइल लॉन्चर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं।
Boeing 767 को टैंकर में बदलने का फायदा
IAI दुनिया की बड़ी विमान कन्वर्जन कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी यात्री विमानों को कार्गो या विशेष सैन्य विमानों में बदलने की विशेषज्ञ मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
नया टैंकर विमान खरीदने की तुलना में कन्वर्जन करीब 20 प्रतिशत सस्ता पड़ता है।
Boeing 767 को अपग्रेड करने के बाद उसे कई दशकों तक उपयोग किया जा सकता है।
इससे भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी के ऑपरेशन में बड़ी मदद मिलेगी।
इन नए टैंकर विमानों से भारतीय लड़ाकू विमान हवा में ही ईंधन भर सकेंगे। इससे:
लड़ाकू विमानों की रेंज बढ़ेगी
लंबी दूरी के मिशन आसान होंगे
युद्ध के दौरान प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होगी
हिंद महासागर और पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक पहुंच बढ़ेगी
2030 से शुरू हो सकती डिलीवरी
रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों की डिलीवरी 2030 से शुरू हो सकती है। HAL और IAI पहले से ड्रोन और मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर भी साथ काम कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता सिर्फ एयर टैंकर खरीद नहीं, बल्कि भारत-इजरायल रक्षा सहयोग के नए दौर की शुरुआत है।

















