
International Desk: डेनमार्क में मुस्लिमों पर शिकंजा कसा जा रहा है। यहां की सरकार लाउडस्पीकर के माध्यम से मस्जिदों में दी जाने वाली अजान पर कानूनी रोक लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश में बढ़ते ‘इस्लामीकरण’ को लेकर उठाई जा रही व्यापक नीति का हिस्सा है।डेनमार्क के आव्रजन एवं एकीकरण मंत्री Morten Bødskov ने कहा कि सरकार इस मुद्दे के कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा, “डेनमार्क की छतों पर अजान नहीं सुनाई देनी चाहिए। डेनमार्क में इसके लिए कोई जगह नहीं है। यहां घूमते समय लोगों को ऐसा नहीं लगना चाहिए कि वे इस्लामाबाद के किसी उपनगर में हैं।”उनके इस बयान के बाद देश में नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
सत्तारूढ़ Social Democrats सरकार की ओर से मस्जिदों में लाउडस्पीकर के उपयोग को सीमित करने का यह तीसरा प्रयास बताया जा रहा है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह अंतिम नीति नहीं, बल्कि कानूनी समीक्षा के चरण में मौजूद एक प्रस्ताव है। डेनमार्क के अधिकारी यह जांच रहे हैं कि क्या देश के संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक पूजा के अधिकार को देखते हुए लाउडस्पीकर पर अजान को प्रतिबंधित करना कानूनी रूप से संभव है। यदि कानून विशेषज्ञ इसे संवैधानिक मानते हैं, तभी सरकार आगे विधायी प्रक्रिया शुरू करेगी। डेनमार्क के कई शहरों, जिनमें Copenhagen भी शामिल है, में शोर-नियंत्रण नियमों के कारण लाउडस्पीकर के उपयोग पर पहले से ही कुछ स्थानीय प्रतिबंध लागू हैं। इसके अलावा 2023 में डेनमार्क ने धार्मिक ग्रंथों के सार्वजनिक अपमान को रोकने के लिए भी नया कानून लागू किया था।
मुस्लिम आबादी कितनी है?
करीब 60 लाख आबादी वाले डेनमार्क में अधिकांश लोग ईसाई धर्म से जुड़े हैं।
देश में लगभग 2.7 लाख मुस्लिम रहते हैं और लगभग 100 मस्जिदें हैं।
पिछले वर्षों में मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया तथा अन्य क्षेत्रों से आए प्रवासियों के कारण मुस्लिम आबादी में वृद्धि हुई है।
मोर्टेन बोडस्कोव ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि सरकार धीरे-धीरे अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रही है।
यूरोप में बढ़ रही है बहस
हाल के वर्षों में यूरोप के कई देशों में आव्रजन, धार्मिक पहचान और सामाजिक एकीकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। डेनमार्क में भी हिजाब, धार्मिक प्रतीकों और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं।

















