International Desk: सिलीगुड़ी गलियारा (Siliguri Corridor) जिसे लंबे समय से “चिकन नेक” कहा जाता रहा है, अब भारत की नई रणनीतिक तैयारी का केंद्र बन गया है। रक्षा और सुरक्षा हलकों में इसे अब “राइनो नेक” यानी गेंडे जैसी मजबूत ढाल में बदलने की चर्चा तेज है। यह वही संकरा भूभाग है जो मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई कई जगह सिर्फ 20 से 22 किलोमीटर तक मानी जाती है, इसलिए इसे हमेशा रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना गया।
क्यों अहम है सिलीगुड़ी कॉरिडोर?
यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में स्थित है । इसके एक तरफ नेपाल, दूसरी तरफ बांग्लादेश और उत्तर में भूटान के पास चीन की रणनीतिक चुम्बी घाटी स्थित है। अगर युद्ध जैसी स्थिति बने, तो इस इलाके पर दबाव डालकर भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को बाकी देश से काटने की आशंका हमेशा जताई जाती रही है।रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजनाओं के लिए करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र को देने की मंजूरी दी है। इसके बाद इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की प्रक्रिया तेज हो गई है।
इस संवेदनशील इलाके से गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का नियंत्रण और समन्वय मजबूत किया जा रहा है ताकि सेना जरूरत पड़ने पर तेजी से टैंक, मिसाइल और भारी उपकरण सीमा तक पहुंचा सके। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि युद्धकालीन लॉजिस्टिक्स बनाए रखने के लिए भूमिगत सुरंगों और सुरक्षित नेटवर्क पर काम हो रहा है, ताकि दुश्मन की निगरानी और हमलों से सप्लाई लाइन सुरक्षित रहे। पूर्वी क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए असम, बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में अतिरिक्त सैन्य ढांचे और फॉरवर्ड बेस विकसित किए जा रहे हैं।
चीन-पाकिस्तान को क्यों चिंता?
चीन और भारत के बीच 2017 का Doklam standoff इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को पहले ही दुनिया के सामने ला चुका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत इस कॉरिडोर को सैन्य और लॉजिस्टिक रूप से और मजबूत कर देता है, तो चीन के लिए इस इलाके पर रणनीतिक दबाव बनाना कठिन हो जाएगा।रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि Inter-Services Intelligence पूर्वी सीमाओं पर अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि इन दावों पर कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय पुष्टि सामने नहीं आई है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, तस्करी और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर सतर्क रही हैं।
क्या सचमुच “राइनो नेक” बनेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार “चिकन नेक” शब्द इस क्षेत्र की कमजोरी का प्रतीक माना जाता था, जबकि “राइनो नेक” का मतलब है मजबूत, आक्रामक और अभेद्य सुरक्षा ढांचा। भारत की कोशिश यही है कि पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी सुरक्षित रहे। युद्ध या संकट में सप्लाई लाइन न टूटे तथा चीन और अन्य संभावित खतरों के खिलाफ तेज सैन्य प्रतिक्रिया संभव हो। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे संवेदनशील बिंदु माना जाता है। बदलते भू-राजनीतिक माहौल और चीन के बढ़ते दबाव के बीच भारत अब इस इलाके को सिर्फ एक संकरी लाइफलाइन नहीं बल्कि मजबूत रणनीतिक किले में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।












