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तेल संकट में भारत बना लाइफलाइनः ‘एनर्जी डिप्लोमेसी’ ने बदला खेल, चीन की रणनीति फेल !

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International Desk: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है और दुनिया भर में कीमतें बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर दक्षिण एशिया के देशों पर पड़ रहा है, क्योंकि वे तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं और उनके पास आर्थिक झटकों से निपटने के लिए सीमित संसाधन हैं। ऐसे समय में छोटे देश जैसे Sri Lanka, Bangladesh, Nepal और Maldives ने मदद के लिए चीन की बजाय भारत का रुख किया है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत जल्दी और सीधे तौर पर ईंधन उपलब्ध करा पा रहा है।भारत ने हाल के महीनों में इन देशों को पेट्रोल, डीजल, LPG और LNG की सप्लाई दी है।

 

उदाहरण के तौर पर, भारत ने श्रीलंका और बांग्लादेश को हजारों टन ईंधन भेजा है और नेपाल व मालदीव की मदद पर भी काम कर रहा है। इससे भारत एक “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” यानी संकट में तुरंत मदद करने वाला देश बनकर उभरा है।दूसरी ओर, चीन की रणनीति Belt and Road Initiative (BRI) पर आधारित है, जिसमें बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल हैं। ये प्रोजेक्ट लंबे समय में फायदेमंद होते हैं, लेकिन अचानक आए संकट में तुरंत राहत देने में उतने कारगर नहीं हैं। इस वजह से संकट के समय दक्षिण एशियाई देश उस देश को चुन रहे हैं जो जल्दी मदद दे सके। भारत की यही क्षमता उसे क्षेत्र में एक भरोसेमंद और मजबूत साझेदार बना रही है।