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कनाडा में इलाज के इंतजार में भारतीय शख्स की गई जान; अमेरिकी वकील ने मौत पर किया शर्मनाक मजाक, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

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International Desk: कनाडा में इलाज के अभाव में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिक प्रशांत श्रीकुमार (Prashant Sreekumar) की मौत को लेकर एक अमेरिकी वकील की विवादित टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। लोगों ने इस टिप्पणी को अमानवीय, असंवेदनशील और घृणा फैलाने वाला बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी वकील एंड्रयू ब्रान्का (Andrew Branca) ने सोशल मीडिया पर श्रीकुमार की मौत से जुड़ी एक पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “कनाडा पर हमला करने वाला भारतीय घुसपैठिया” बताया। उन्होंने यह भी लिखा कि यदि वह भारत में ही रहते तो कनाडा की स्वास्थ्य व्यवस्था से बच सकते थे। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब श्रीकुमार की मौत को लेकर कनाडा की स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले से सवाल उठ रहे हैं।

 

सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा
वकील की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने नाराजगी जताई। कई यूजर्स ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु पर मजाक उड़ाना मानवता के खिलाफ है। एक यूजर ने लिखा कि किसी की मौत पर नफरत फैलाना बेहद शर्मनाक है। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि मृत व्यक्ति और उसके परिवार का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि उनकी त्रासदी का मजाक बनाया जाना चाहिए।

 

एंड्रयू पहले भी भारतीयों पर कर चुके विवादित टिप्पणियां
रिपोर्टों के अनुसार, एंड्रयू ब्रांका पहले भी भारतीयों को लेकर विवादित और अपमानजनक टिप्पणियां कर चुके हैं। उन पर भारतीय समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रहपूर्ण बयान देने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ टिप्पणियां करने के आरोप लगते रहे हैं। अब यह मामला भी केवल स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब सोशल मीडिया पर नफरत भरे बयानों, प्रवासी समुदायों के प्रति पूर्वाग्रह और सार्वजनिक विमर्श में संवेदनशीलता की कमी को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।

 

क्या है प्रशांत श्रीकुमार का मामला?
44 वर्षीय प्रशांत श्रीकुमार को दिसंबर में सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद कनाडा के Grey Nuns Community Hospital ले जाया गया था। परिवार के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें करीब आठ घंटे तक उपचार का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उनकी हालत बिगड़ती गई। बताया गया कि प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें प्रतीक्षा करने को कहा गया और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद कनाडा की स्वास्थ्य व्यवस्था में बढ़ते इंतजार समय और आपातकालीन सेवाओं की स्थिति को लेकर बहस तेज हो गई थी।