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हाईकोर्ट का आदेश. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सी.ई.टी.-2 परीक्षा में करें शामिल

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चंडीगढ़ : हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एच.एस.एस.सी.) की पुलिस भर्ती प्रक्रिया और सी.ई.टी.-2 परीक्षा में शार्टलिस्टिंग के तरीके को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को फिलहाल अस्थायी रूप से सी.ई.टी.-2 परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश के आधार पर याचिकाकर्ताओं को अंतिम सुनवाई में किसी प्रकार का विशेष अधिकार या लाभ नहीं मिलेगा।

जस्टिस संदीप मौदगिल की अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया कि इसी प्रकार का एक अन्य मामला पहले से लंबित है, जिसमें समान कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं और उस मामले की सुनवाई 2 जुलाई 2026 को निर्धारित है। हरियाणा सरकार की ओर से नोटिस स्वीकार करते हुए अदालत को बताया कि चयन और परीक्षा प्रक्रिया के तहत आयोग उम्मीदवारों की शार्टलिस्टिंग बैचों में करेगा। प्रत्येक श्रेणी के लिए विज्ञापित पदों की संख्या के दस गुना अभ्यर्थियों को नॉलेज टैस्ट के लिए बुलाया जाना है और यह प्रक्रिया श्रेणीवार अपनाई जाएगी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित हैं और 30 जनवरी 2024 को जारी अधिसूचना तथा पंजाब पुलिस नियम, 1934 के अनुसार क्वालिफाइंग टैस्ट भी श्रेणीवार ही आयोजित किया जाना है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण को प्रत्येक चरण में लागू करने संबंधी हाईकोर्ट के पूर्व आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

हालांकि अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट हुआ कि वह मामला अलग पदों से संबंधित था। याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान हाईकोर्ट के एक मामले का हवाला दिया गया। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ताओं ने सामान्य वर्ग की कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए सी.ई.टी.-2 परीक्षा में प्रोविजनल तौर पर शामिल होने की अनुमति प्रदान कर दी। मामले की अगली सुनवाई अब 2 जुलाई को होगी।