Punjabi News

GST Reforms: आम आदमी को मिल सकती है राहत! कल से सस्ती हो सकती हैं डेली यूज़ की ये 175 चीज़ें, जल्दी से चेक करें लिस्ट

241

नेशनल डेस्क: पीएम मोदी ने 15 अगस्त से लाल किले से दिवाली पर नए GST सुधार लाने की बात कही थी। इस ऐलान के बाद जीएसटी काउंसिल की यह पहली और सबसे महत्वपूर्ण बैठक है, जो आज से शुरू हो चुकी है। यह बैठक दो दिन तक चलेगी और उम्मीद है कि इसमें कई सारे महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक के बाद आम आदमी को राहत मिल सकती है।
वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी संकेत दिया है कि इस बैठक में GST की दरों को लॉजिकल बनाने पर चर्चा होगी। यदि ऐसा होता है कि इससे रोजमर्रा की चीजों के साथ-साथ महंगी वस्तुएं भी सस्ती हो सकती हैं।
क्या अब होंगे सिर्फ दो टैक्स स्लैब?

प्रस्ताव के अनुसार जीएसटी के चार मौजूदा स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%) को घटाकर सिर्फ दो किया जा सकता है। हानिकारक और लग्जरी वस्तुओं को छोड़कर, 28% स्लैब वाली सभी वस्तुएं 18% स्लैब में आ सकती हैं। वहीं 12% स्लैब वाली वस्तुएं 5% स्लैब में शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा एक 40% का नया स्लैब भी बनाया जा सकता है, जो सिर्फ 6-7 खास चीजों पर लागू होगा, जिनमें से ज्यादातर हानिकारक या बहुत महंगी वस्तुएं होंगी।
ये 175 चीजें हो सकती हैं सस्ती

अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो करीब 175 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम हो सकती हैं। इन चीजों में रोजमर्रा के इस्तेमाल की कुछ वस्तुएं नीचे दी गई हैं-

खाद्य पदार्थ: बादाम, स्नैक्स, रेडी-टू-ईट आइटम, जैम, घी, मक्खन, अचार, मुरब्बा, और चटनी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन: एसी, रेफ्रिजरेटर, ऑटोमोबाइल और ट्रैक्टर भी सस्ते हो सकते हैं।
12-28% स्‍लैब में आने वाली कुछ खास वस्‍तुएं

घी
मक्खन
चीज
पैक्ड फ्रोजन सब्जि‍यां
फ्रूट जूस (अधिकतर, नॉन-एरेटेड)
छाता
सोलर वॉटर हीटर
कृषि उपकरण
एयर कंडीशनर
सीमेंट
कार/एसयूवी

 

माना जा रहा है कि अगर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो GST की औसत दर जो अभी करीब 11.5% है, घटकर 10% से नीचे आ जाएगी।

 

 

स्वास्थ्य और बीमा पर जीएसटी खत्म करने की मांग

बैठक में एक और बड़ा प्रस्ताव स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम को GST के दायरे से बाहर रखने का है। इस कदम से लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होगा। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के अनुसार इससे सालाना करीब ₹9,700 करोड़ का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है।