नेशनल डेस्क: अगर आपने पिछले कुछ वर्षों में सोने में निवेश किया है, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। बीते 6 सालों में सोने की कीमतों ने ऐसा रफ्तार पकड़ी है कि शेयर बाजार और दूसरे पारंपरिक निवेश विकल्प पीछे छूट गए हैं। जहां 2019 में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग ₹32,000 थी, वहीं 2025 के जून तक यह आंकड़ा करीब ₹98,000 तक पहुंच चुका है — यानी लगभग 200% का बेजोड़ रिटर्न।
सोने में रिटर्न ने सबको चौंकाया
मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत में इस साल ही लगभग 30% की तेजी आई है। वहीं, चांदी ने भी करीब 35% तक की छलांग लगाई है। इसकी तुलना में अगर शेयर बाजार देखें तो निफ्टी 50 इस साल सिर्फ 4.65% और बीएसई सेंसेक्स 3.75% का रिटर्न ही दे पाया है।
सोना या शेयर: कौन है असली चैंपियन?
साल 2025 में जिन शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया, उनमें रिलायंस के स्टॉक्स ने करीब 14% का मुनाफा दिया, जबकि एचडीएफसी बैंक के शेयर 12.5% ऊपर गए। लेकिन सोने के मुकाबले यह रिटर्न मामूली साबित हुए।
कीमतें बढ़ीं क्यों?
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले छह वर्षों में कई वैश्विक घटनाओं ने सोने की कीमत को ऊंचाई दी।
कोरोना महामारी के कारण बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता,
जियोपॉलिटिकल तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध),
केंद्रीय बैंकों की नरम मौद्रिक नीतियां,
और ग्लोबल मार्केट में निवेशकों का रुझान – ये सभी कारण सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में और मजबूत बनाते गए।
अब आगे क्या?
एसएस वेल्थ स्ट्रीट की चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट सुगंधा सचदेवा का मानना है कि आने वाले 5 वर्षों में सोने की कीमतें ₹1.35 लाख से ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकती हैं। वहीं, लाइव मिंट की एक रिपोर्ट और भी चौंकाने वाला अनुमान देती है- यदि मौजूदा रफ्तार बनी रही तो 2030 तक सोना ₹2.25 लाख प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
अगर आप सुरक्षित और स्थायी रिटर्न की तलाश में हैं, तो सोना एक बार फिर आपके पोर्टफोलियो में दमदार जगह बना सकता है। चाहे ज्वेलरी के रूप में हो, डिजिटल गोल्ड में, या गोल्ड बॉन्ड्स के ज़रिए — सोना एक ऐसा निवेश बन गया है जो संकट के समय में भी भरोसेमंद साबित होता है।













