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Gold Price Forecast: सोना जाएगा ₹3 लाख के पार, किस के बयान ने बढ़ाई हलचल?

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बिजनेस डेस्कः Gold Price Forecast अमेरिकी अर्थशास्त्री और दिग्गज मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट एड यार्डेनी (Ed Yardeni) के एक बयान ने सर्राफा बाजार में हलचल मचा दी है। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है, जिससे भारतीय बाजार में सोना ₹3 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को भी पार कर सकता है। Yardeni Research के प्रेसिडेंट एड यार्डेनी ने अनुमान जताया है कि साल 2029 तक सोना 10,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकता है।

यह अनुमान उनके लंबे समय के ‘Roaring 2020s’ आउटलुक का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स S&P 500 के लिए भी मजबूत तेजी का अनुमान दिया है।

फिलहाल कहां है सोने का भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क स्थित COMEX पर सोने की कीमत इस समय करीब 4,514 डॉलर प्रति औंस के आसपास है। MCX पर सोने का भाव 1,38,500 रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास है।
क्या भारत में सोना ₹3 लाख के पार जाएगा?
अगर सोना मौजूदा 4,510 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 10,000 डॉलर तक पहुंचता है, तो इसमें करीब 127 फीसदी की तेजी होगी। इसी अनुपात में भारतीय बाजार में MCX पर मौजूदा करीब 1,38,500 रुपए प्रति 10 ग्राम का भाव बढ़कर 2029 तक लगभग 3.08 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।

सोने पर यार्डेनी का भरोसा क्यों?
Ed Yardeni का कहना है कि निवेश पोर्टफोलियो में सोने की भूमिका आज भी बेहद अहम बनी हुई है। इतिहास बताता है कि जब-जब सोने में बड़ी रैली आई है, उसने निवेशकों की उम्मीद से कहीं ज्यादा ऊंचाई छुई है। उनके मुताबिक, लंबी अवधि में सोना और इक्विटी अक्सर एक ही दिशा में चलते हैं, इसलिए सोना सिर्फ संकट का नहीं बल्कि दीर्घकालिक निवेश का भी मजबूत विकल्प है।
अमेरिकी शेयर बाजार पर नजरिया
यार्डेनी अमेरिकी शेयर बाजार को लेकर भी सकारात्मक हैं। उन्हें उम्मीद है कि 2026 के अंत तक S&P 500 इंडेक्स 7,700 के स्तर तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि लगातार तीसरे साल डबल-डिजिट रिटर्न संभव दिख रहा है, जबकि चौथे साल भी ऐसा प्रदर्शन पूरी तरह असंभव नहीं है।

भारत पर क्या है राय
भारत को लेकर यार्डेनी का मानना है कि 2025 मजबूत रैली के बाद कंसोलिडेशन का साल हो सकता है, लेकिन 2026 में नए अवसर बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत ट्रेड बातचीत आगे बढ़ने पर भारतीय बाजार नए रिकॉर्ड बना सकता है। निवेश के लिहाज से वे चीन की तुलना में भारत को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि भारत का लीगल और कॉरपोरेट ढांचा ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद है।