दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को ‘विमल इलायची’ बनाने वाली कंपनी PB Agro LLP की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा कंपनी के ब्रांड एंबेसडर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ को रद्द करने की मांग की गई थी।
FDA के आरोपों की सच्चाई पर कोई फ़ैसला सुनाए बिना याचिका को खारिज करते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र ही सही जगह है क्योंकि कलाकार वहीं रहते हैं और नोटिस भी उसी राज्य से जारी हुआ था। कोर्ट ने PB Agro की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि दिल्ली में FSSAI और सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) जैसे केंद्रीय रेगुलेटर की मौजूदगी से दिल्ली में अधिकार-क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) बनता है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का क्षेत्रीय अधिकार नहीं बनता। नोटिस से जुड़ी शिकायत के लिए महाराष्ट्र की अदालतें ज्यादा सही और सुविधाजनक मंच हैं।
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने 14 अगस्त को खान, देवगन और श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन में दिखाई देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। रेगुलेटर का आरोप है कि यह कैंपेन अप्रत्यक्ष रूप से विमल पान मसाला को बढ़ावा देता है, जो महाराष्ट्र में प्रतिबंधित उत्पाद है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि विमल इलायची के विज्ञापन असल में विमल पान मसाला का सरोगेट प्रमोशन (अप्रत्यक्ष प्रचार) हैं, जो महाराष्ट्र में प्रतिबंधित उत्पाद है।
FDA का कहना है कि विज्ञापन का प्रस्तुतीकरण, संवाद, उत्पाद का नाम और विमल ब्रांड का पान मसाला के साथ जुड़ाव सरोगेट विज्ञापन (छद्म विज्ञापन) पर सवाल खड़े करते हैं।
विमल इलायची बनाने वाली कंपनी PG Agro LLP ने एक याचिका दायर करके उन नोटिसों को रद्द करने की मांग की जो तीन अभिनेताओं को भेजे गए थे। कंपनी का आरोप था कि महाराष्ट्र FDA के पास विज्ञापन रोकने का निर्देश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं था।
यह भी कहा गया कि नोटिस अभिनेताओं को भेजे गए थे, न कि कंपनी को, जबकि कंपनी का कहना था कि कैंपेन के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से वह सीधे तौर पर प्रभावित होगी।



















