सोलन (नरेश पाल): आरएलए सोलन वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े में तत्कालीन रजिस्ट्रेशन क्लर्क को निलंबित किया गया है। निदेशक लैंड रिकॉर्ड ने यह कार्रवाई की है। निलम्बित रजिस्ट्रेशन क्लर्क का डीसी कार्यालय सोलन हैडक्वार्टर फिक्स किया गया है। डीसी सोलन मनमोहन शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। डीसी सोलन की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट पर यह कार्रवाई की गई है।
यहां पर विदित रहे कि जनवरी के अंतिम सप्ताह में आरएलए सोलन में वाहन पंजीकरण के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। यह मामला सामने आते ही एसडीएम सोलन डॉ. पूनम बंसल ने 27 जनवरी को सदर थाना सोलन में शिकायत दर्ज की, जिसमें बताया गया है कि यूपी नंबर के 3 ट्राले आरएलए सोलन में फर्जी तरीके से पंजीकृत ही नहीं हुए, बल्कि आरएलए बिलासपुर को ट्रांसफर भी गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर इस मामले की छानबीन भी शुरू कर दी। दूसरी तरह एसडीएम सोलन ने भी अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि वाहन पोर्टल में एडमिन के मोबाइल नंबर को बदल कर रजिस्ट्रेशन क्लर्क का फोन नंबर पाया गया और 2 फर्जी आईडी बनाकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।
जांच में पता चला कि यह फर्जी आईडी 29 अक्तूबर को बनाई गई थी। उसके बाद से लेकर जनवरी मध्य तक 40 से अधिक वाहन के पंजीकरण किए गए हैं। इसमें कई वाहन आरएलए झंडूता, आरएलए बिलासपुर व आरएलए नूरपुर सहित कई अन्य आरएलए को ट्रांसफर किए गए हैं। एसडीएम सोलन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इन सभी वाहनों की ट्रांजैक्शन को ब्लॉक कर दिया। वाहन पोर्टल में नोट टू बी ट्रांजैकेटिड श्रेणी में डाल दिया। यही नहीं, उन सभी आरएलए को भी यह कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा, जहां पर इन वाहनों को ट्रांसफर किया गया है।
दूसरी तरफ एसडीएम सोलन ने यह मामला सामने आते ही सम्बन्धित कर्मचारी को रजिस्ट्रेशन क्लर्क के पद से हटाकर अपने कार्यालय में तैनाती कर दी। यही नहीं, उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया। इस मामले के सामने आने के बाद जब एसडीएम ने सम्बन्धित क्लर्क से 3 ट्रालों की फाइलों को तलब किया तो उन्होंने पहले इन फाइलों को देने के लिए बहाने बनाने शुरू कर दिए। जब दबाव बढ़ा तो उन्होंने बताया कि यह रजिस्ट्रेशन हमारे कार्यालय से नहीं, बल्कि बाहर से हुई है। उस समय जिला बिलासपुर में वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े का मामला सामने आ गया था। इस पर एसडीएम सोलन ने पुलिस में शिकायत की और फिर पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट डीसी सोलन को सौंप दी। यही नहीं, पुलिस को इस जांच रिपोर्ट का रिकॉर्ड दिया गया। डीसी सोलन ने यह जांच रिपोर्ट निदेशक लैंड रिकॉर्ड को भेज दी और साथ में सम्बन्धित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। डीसी कार्यालय कर्मचारियों का अब स्टेट काडर हो गया है। इस कारण अब उनके खिलाफ कार्रवाई निदेशक लैंड रिकॉर्ड द्वारा ही की जाती है।
एसपी सोलन ने भी इस मामले की जांच के लिए डीएसपी अशोक चौहान की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। डीसी सोलन मनमोहन शर्मा ने बताया कि निदेशक लैंड रिकॉर्ड ने वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े में तत्कालीन रजिस्ट्रेशन क्लर्क को निलम्बित कर डीसी कार्यालय हैडक्वार्टर फिक्स किया है।
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