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स्विट्जरलैंड में 80 मिनट चली Iran-US वार्ताः हिजबुल्ला-इजराइल संघर्ष पर नया फार्मूला तैयार, अंतिम समझौते के रोडमैप पर भी सहति

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International Desk: स्विट्जरलैंड के ओबबुर्गेन में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से चल रही उच्चस्तरीय वार्ता का पहला चरण सोमवार को समाप्त हो गया। स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के दौरान ईरान और अमेरिका ने 60 दिनों के भीतर अंतिम शांति समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप (कार्ययोजना) पर भी सहमति जताई है। पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थों ने बताया कि दोनों पक्षों ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर सहमति दी है, जो अगले 60 दिनों के दौरान तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत को आगे बढ़ाएगी। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बातचीत के दौरान दोनों पक्ष लेबनान में जारी संघर्ष से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए एक “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल” (तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र) स्थापित करने पर सहमत हुए हैं।

 

पाकिस्तान और कतर द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार इस तंत्र में लेबनान सरकार भी शामिल होगी। इसका मुख्य उद्देश्य लेबनान में सैन्य अभियानों को समाप्त करने संबंधी समझौतों के पालन की निगरानी करना और तनाव को बढ़ने से रोकना होगा। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला और इजराइल के बीच जारी संघर्ष को रोकने में कितनी प्रभावी साबित होगी। इजराइल पहले ही साफ कर चुका है कि वह लेबनान के कुछ क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा और उत्तरी इजराइल पर हमले करने वाले समूहों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का अधिकार अपने पास रखना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि बातचीत में “महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है।

उन्होंने कहा कि वार्ता की सफलता की पहली वास्तविक परीक्षा लेबनान में बनने वाला यह समन्वय तंत्र होगा। अराघची ने स्पष्ट किया कि यदि यह व्यवस्था इजराइल और हिजबुल्ला के बीच जारी लड़ाई को कम करने में सफल रहती है, तो इसे शांति प्रक्रिया की बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। वार्ता की शुरुआत तनावपूर्ण माहौल में हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि उसने लेबनान में अपने समर्थक समूहों की गतिविधियां नहीं रोकीं तो अमेरिका और अधिक कठोर कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप के इन बयानों पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। ईरानी संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि अमेरिकी नेताओं को अपने शब्दों को लेकर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी जवाब के लिए तैयार हैं।

 

ईरानी मीडिया के अनुसार अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance, अमेरिकी प्रतिनिधि Steve Witkoff और Jared Kushner ने ईरानी प्रतिनिधियों मोहम्मद बाकिर गालिबाफ और अब्बास अराघची के साथ लगभग 80 मिनट तक बैठक की। बैठक के बाद पाकिस्तान और कतर ने घोषणा की कि इस सप्ताह के दौरान स्विट्जरलैंड में वार्ताओं का अगला दौर भी जारी रहेगा। इसी बीच ईरान ने दावा किया कि उसने सप्ताहांत में एक बार फिर Strait of Hormuz को बंद कर दिया है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रही। ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।