
चंडीगढ़:पंजाब विधान सभा के स्पीकर श्री कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को कुछ ही दिनों में “ओटीटी” से हटा दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार सच्चाई से इतना डरती क्यों है?
उन्होंने आगे बताया कि कांग्रेस के शासनकाल के दौरान हज़ारों पंजाबी नौजवानों को गैर-कानूनी तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया था। अनगिनत नौजवान गायब हो गए। कई माताएँ अपने बेटों की प्रतीक्षा में इस दुनिया से चली गईं। कितने ही परिवारों को आज तक अपने बच्चों का मृत्यु प्रमाण पत्र तक नहीं मिला। न्याय तो दूर की बात है, उनके दर्द को भी केंद्र सरकार ने नज़रअंदाज कर दिया।
यह हमारे पंजाब के इतिहास का काला अध्याय है, जिसके बारे में हर पंजाबी बच्चे को पता होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इन घटनाओं पर आधारित ‘सतलुज’ जैसी फिल्म को पिछले तीन सालों से रिलीज़ नहीं होने दिया गया। सेंसर बोर्ड द्वारा इस फिल्म पर 127 कट लगाए गए थे। लेकिन दूसरी ओर, ‘केरल स्टोरी’, ‘कश्मीर फाइल्स’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्में बिना किसी रुकावट के रिलीज़ की गईं।
स्पीकर संधवां ने कहा कि जब ‘सतलुज’ बिना किसी कट के “ओटीटी” पर आई तो इसे तुरंत हटा दिया गया। केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए कि पंजाब के दर्द और पंजाब की सच्चाई से इतना डर क्यों लगता है?
उन्होंने कांग्रेस को घेरते हुए मांग की कि उनके शासनकाल में मारे गए हज़ारों नौजवानों के परिवारों को न्याय कब मिलेगा। संधवां ने कहा, “एक सच्ची कहानी को लोगों तक पहुँचने से रोकना लोकतंत्र के साथ विश्वासघात है। यह सच्चाई को दबाने की सोची-समझी कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है।”
उन्होंने आगे बताया कि सतलुज फिल्म काल्पनिक नहीं है बल्कि तथ्यों पर आधारित दस्तावेज़ी कहानी है। यह फिल्म पूरी तरह से सीबीआई जाँच और आधिकारिक अदालती दस्तावेज़ों पर आधारित है, जो एक तल्ख सच्चाई को उजागर करती है।
ऐतिहासिक रूप से, कांग्रेस पार्टी ने पंजाब के खिलाफ यह आक्रामक रुख अपनाया था। अब अहम सवाल यह है कि क्या भाजपा भी उसी राह पर चल रही है, पिछली नीतियों को मज़बूत कर रही है और पुराने ज़ख्मों को कुरेद रही है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा जी राष्ट्र के शहीद हैं और सभी को उनकी कुर्बानी के बारे में पता होना चाहिए। अब पंजाब को न्याय की ज़रूरत है। पंजाब की सच्चाई को दबाया नहीं जाना चाहिए।
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