हिमाचल डेस्क : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश के उन विधायकों को नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में वोट डालने की अनुमति दे दी, जो नगरपालिकाओं के पदेन सदस्य होते हैं। शीर्ष अदालत ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के चार जून के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें पदेन सदस्य विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में वोट डालने से रोका गया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा, ”नतीजतन, जहां भी अब तक नगरपालिकाओं के चुनाव हुए हैं, वहां उन निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधानसभा सदस्य जिनका क्षेत्र पूरी तरह या आंशिक रूप से नगरपालिका क्षेत्र में आता है, वे नगरपालिका के पदाधिकारियों के चुनाव में वोट देने के हकदार होंगे।” शीर्ष अदालत कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और अन्य लोगों द्वारा उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने विधायकों को वोट डालने की इजाजत देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे पदाधिकारियों के चुनाव के परिणाम उच्च न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन होंगे।
17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
हालांकि, पीठ ने उन 11 लोगों को भी नोटिस जारी किए, जिन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान की अनुमति देने का विरोध किया था। इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में संवैधानिक व्यवस्था और हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 और उसके तहत बने नियमों का जिक्र किया था। अदालत ने माना था कि पदेन सदस्य विधायकों को वोट देने का अधिकार तो है, लेकिन वे नगरपालिकाओं के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

















