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रूस-पाकिस्तान में बढ़ीं नजदीकियांः ग्वादर पोर्ट को INSTC से जोड़ेंगे पुतिन, बढ़ेगी भारत की टेंशन

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International Desk: रूस ने पाकिस्तान के रणनीतिक ग्वादर पोर्ट को International North-South Transport Corridor (INSTC) से जोड़ने की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया और यूरेशिया की बदलती भू-राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक (Alexey Overchuk) ने कजान फोरम के दौरान कहा कि मॉस्को और इस्लामाबाद लंबे समय से नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के जरिए कनेक्टिविटी बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रेलवे और समुद्री संपर्क समेत कई विकल्पों पर बातचीत चल रही है और रूस पाकिस्तान की इस पहल का स्वागत करता है।

 

क्या है INSTC?
International North-South Transport Corridor करीब 7,200 किलोमीटर लंबा बहु-परिवहन व्यापार गलियारा है, जिसे मूल रूप से India, Russia और Iran ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य रूस और मध्य एशिया को ईरान के बंदरगाहों तथा हिंद महासागर से जोड़ना है, ताकि यूरोप और एशिया के बीच व्यापार तेज और सस्ता हो सके। अब यदि पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह इस नेटवर्क से जुड़ता है, तो यह कॉरिडोर सीधे China-Pakistan Economic Corridor (CPEC) और चीन की Belt and Road Initiative (BRI) से भी जुड़ सकता है।
क्यों बढ़ेगी भारत की टेंशन?
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्वादर बंदरगाह का INSTC से जुड़ना भारत के लिए कई रणनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। ग्वादर अरब सागर और Strait of Hormuz के बेहद करीब स्थित है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। भारत लंबे समय से ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में यदि रूस और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक व सामरिक सहयोग मजबूत होता है, तो यह भारत के प्रभाव को चुनौती दे सकता है।

 

चीन को मिलेगा फायदा

ग्वादर पहले से ही चीन समर्थित China-Pakistan Economic Corridor का प्रमुख हिस्सा है।
यदि INSTC और CPEC के बीच कनेक्टिविटी बनती है, तो चीन को अरब सागर और मध्य एशिया तक अधिक मजबूत पहुंच मिल सकती है।
इससे बीजिंग की क्षेत्रीय आर्थिक और रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।
पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस लगातार नए व्यापारिक और समुद्री रास्तों की तलाश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मॉस्को अब ऐसे वैकल्पिक मार्ग विकसित करना चाहता है जो उसे पश्चिमी देशों और पारंपरिक समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने में मदद करें।
पाकिस्तान के लिए भी यह अवसर ट्रांजिट व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय हब बनने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।