नेशनल डेस्क: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित वीडियो विवाद में नया मोड़ सामने आया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भगवंत मान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पोस्ट कर लिखा, गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ा आपराधिक मामला दर्ज किया है। इससे पंजाब के CM भगवंत मान को राजनीतिक और धार्मिक बर्बादी से बचाने और फॉरेंसिक सबूतों में हेरफेर करने की सरकारी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। FIR नंबर 0263 (DLF सेक्टर-29) का सामने आना एक बड़े धमाके जैसा है।
आपराधिक आरोप
उन्होंने कहा, यह सिर्फ़ एक राजनीतिक विवाद नहीं है, यह एक गंभीर आपराधिक जांच का मामला है। FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं का इस्तेमाल किया गया है – जिसमें संगठित अपराध के लिए धारा 111(2)(a), धोखाधड़ी के लिए धारा 318(2), और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में हेरफेर के लिए धारा 336/340 शामिल हैं, साथ ही IT एक्ट भी लागू किया गया है। सरकारी तंत्र को असलियत बदलने के लिए कानूनी डेटा में सुनियोजित तरीके से हेरफेर करने की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
फाइव-स्टार साजिश और ₹10 लाख कैश
FIR के मुताबिक, व्हिसलब्लोअर जसप्रीत सिंह को 15-16 जून को गुरुग्राम के क्राउन प्लाजा होटल में कुछ लोगों ने घेरा। ये लोग खुद को पंजाब के सीनियर अधिकारी और एक बड़े अधिकारी (बड़े साहब) बता रहे थे।
आर.पी. सिंह ने पोस्ट में आगे लिखा, जब जसप्रीत ने उन्हें चेतावनी दी कि वीडियो की क्वालिटी इतनी खराब है कि उससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि यह डीपफेक है, तो मामला गंभीर हो गया कि उनके परिवार को गंभीर धमकियां दी गईं और एक मनमुताबिक AI-जनरेटेड’ क्लीन चिट खरीदने के लिए उनकी गाड़ी में जबरदस्ती ₹10 लाख कैश डाल दिया गया।
फर्जी लैब का खुलासा
जब एक्सपर्ट अपनी बात से नहीं डिगे, तो साजिश रचने वालों ने उन्हें दरकिनार कर दिया। पंजाब के अज्ञात अधिकारियों ने पंचकूला और दिल्ली में दो कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले ऑपरेटरों – अरुण महेंद्रू और अंकित शर्मा – को पेन ड्राइव पहुंचाईं।
अधिकारियों की तरफ से लगातार WhatsApp पर मिल रहे निर्देशों के तहत, उन्होंने ‘साइफर सेंटिनल लैब’ और ‘साइबर यान लैब’ के नाम से देखने में असली लगने वाले क्लीयरेंस सर्टिफिकेट बनाए – जांचकर्ताओं ने पाया कि ये लैब असल में कहीं मौजूद ही नहीं हैं और न ही इनके पास कोई कानूनी मान्यता है। अब दोनों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
ढाल का टूटना
उन्होंने आगे कहा, कुछ ही दिन पहले, AAP लीडरशिप ने बड़े गर्व से ‘इंडिपेंडेंट लैब रिपोर्ट’ दिखाईं ताकि भगवंत मान को बेदाग़ साबित किया जा सके और अकाल तख्त साहिब के उस आधिकारिक बयान को खुलेआम चुनौती दी जा सके जिसमें कहा गया था कि वीडियो असली है। आज, वे ‘इंडिपेंडेंट लैब’ असल में धोखाधड़ी करने वाले नकली सेटअप निकले, जिन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए लोग चला रहे थे और जो एक क्रिमिनल सिंडिकेट का हिस्सा थे। नकली साइंस और सरकार के समर्थन से डरा-धमकाकर पंथ और जनता को गुमराह करना मान सरकार के लिए एक घातक चोट है। अब इस्तीफ़ा ही एकमात्र विकल्प बचा है।














